नई दिल्ली एक वरिष्ठ इंटेलीजेंस ऑफिसर का कहना है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना को रोका जा सकता था अगर तब प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव सरकार ने उत्त्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया होता और कारसेवकों को वहां इकट्ठे होने पर रोक लगा दी होती।
बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी राव को अंत तक आश्वस्त करते रहे थे कि मस्जिद को कुछ भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। रिसर्च एंड एनेलिसिस विंग में वरिष्ठ स्तर पर दोस्ताना संबंध आने वाले एक हिंदू धार्मिक नेता ने हालांकि बार- बार आगाह किया था कि राव को किसी भी हालत में आडवाणी के आश्वासन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि हिंदू कार्यकर्ता मस्जिद को गिरा सकते हैं।
कैबिनेट सेक्रेटेरिएट में पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी बी रमन ने अपनी हालिया किताब काउबॉयज ऑफ रॉ-.. डाउन द मेमोरी लेन में यह खुलासा किया है। उनका कहना है कि ये चेतावनियां तब प्रधानमंत्री राव को मौखिक तौर पर पहुंचा दी गई थीं। रमन कहते हैं कि राव ने पहले तो रॉ के गैस्ट हाउस में आडवाणी से मुलाकात का विचार किया। फिर बाद में उन्हें रॉ से कहा कि वह उन्हें एक रिकॉर्डिग डिवाइस उपलब्ध कराए और उन्हें बताएं कि कैसे उसका इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि वे खुद आडवाणी से बातचीत को रिकॉर्ड कर सकें। मस्जिद के विध्वंस के बाद उन्होंने इस डिवाइस को रॉ को वापस कर दिया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया था कि उन्होंने इसका इस्तेमाल किया था या नहीं, न ही इस बार में रॉ ने उनसे पूछा ही।
रमन का कहना है कि यह इंटेलीजेंस ब्यूरो, रॉ और गृह मंत्रालय ही थे जो लगातार राव को इस बार में आगाह करते रहे थे कि हिंदू कार्यकर्ताओं को किसी भी हालत में अयोध्या में न घुसने दिया जाए और उत्तर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर तुरंत वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए।