नई दिल्लीपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन आलोचनाओं को सिरे से ही खारिज कर दिया कि संसद पर हमले के मुख्य आरोपी अफजल की दया याचिका पर राष्ट्रपति भवन की ओर से देरी की गई। उन्होंने साफ कर दिया कि उन्हें इससे संबंधित एक भी कागज नहीं मिला।
एक साप्ताहिक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कलाम ने कहा, 'मेरे पास संबंधित मंत्रालय से एक भी कागज नहीं पहुंचा। अगर मुझे कोई कागज मिलता तो मैं तुरंत उसे अगली कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा देता।'
गौरतलब है कि कलाम ने फांसी की सजा प्राप्त अफजल गुरु की दया याचिका नियमानुसार गृह मंत्रालय को भेज दी थी। इस पर गृह मंत्रालय को ही कोई फैसला लेना होता है।
बिहार में राष्ट्रपति शासन 'जिस समय बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया गया, उस वक्त मैं रूस में था। इस मुद्दे पर मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से विस्तृत चर्चा की थी और जो भी मुझे जानकारी चाहिए थी, वे ई-मेल व अन्य इलेक्ट्रानिक साधनों के जरिये मुझ तक पहुंचा दी गई थीं। उसी आधार पर मैंने हस्ताक्षर करने का निर्णय लिया।'
लाभ का पद विधेयक 'इस विधेयक के पहली बार लौटाने के बाद उन्होंने (सांसदों) संसद में इस पर चर्चा की। इससे जरूरी असर तो हुआ ही।'
अगर पीएम का पद मिलता! 'यह आपके लिए बड़ा रसीला सवाल हो सकता है, लेकिन मेरे लिए यह एक काल्पनिक सवाल है।' पांच यूनिवर्सिटियों में शिक्षण का दायित्व संभालने जा रहे कलाम ने कहा, 'मेरी प्लेट पहले से ही भरी हुई है।'
अटल, मनमोहन-दोनों भले 'दोनों में अद्वितीय क्षमता है और दोनों विचारक हैं। दोनों बोलने में कम, काम करने में ज्यादा भरोसा करते हैं।'
शिक्षा संस्थानों में आरक्षण 'जितना आरक्षण देना हो, उसी के अनुरूप सीटों की संख्या भी बढ़ा दी जानी चाहिए।'
विकास पर हो फोकस 'किसी भी राजनीतिक फैसले में विकास को उच्च प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। मिसाल के तौर पर, कोई भी राजनीतिक दल यह तय नहीं कर पाया है कि कब तक भारत आर्थिक रूप से विकसित राष्ट्र बन जाएगा। न ही उन्होंने कभी इस बात पर चर्चा की कि अन्य देशों की तुलना में भारत को कैसे समर्थ बनना चाहिए।'
70 फीसदी हो विकास की राजनीति 'हर राजनेता को कम से कम 70 फीसदी समय विकासपरक राजनीति को देना चाहिए, लेकिन हो इसके उलट रहा।'
राष्ट्रपति के अधिकारों की समीक्षा की जरूरत नहीं : '50 साल से भी अधिक समय से संविधान विभिन्न परीक्षाओं में लगातार पास होता आया है। .. जहां तक मेरा सवाल है, मुझे कभी भी काम करने में कोई दिक्कत नहीं आई।..अगर कोई व्यक्ति कुछ करना चाहें, तो कोई भी पद उसे रोक नहीं सकता। अगर राष्ट्रपति के पास कोई नजरिया है तो वह उसे आगे बढ़ाएं। कोई भी व्यक्ति उसे रोक नहीं सकता।'