राज्य विधानसभा में शुक्रवार को सत्तारूढ़ दल उस समय विचित्र स्थिति में आ गया, जब दो भाजपा विधायकों (उमाशंकर गुप्ता और सुनील नायक) ने पत्रकार पवन विद्रोही हत्याकांड के आरोपियों की 24 दिनों बाद भी गिरफ्तारी न होने को लेकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
विपक्ष ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। इस मुद्दे पर गैर विपक्षी दलों ने सरकार पर हत्यारों को बचाने का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट किया। शुक्रवार को यह मामला विधानसभा में कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा, रामनिवास रावत व भाजपा के सुनील नायक ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से उठाया था।
उनका कहना था कि पवन को लगातार धमकी मिलने और संभावित हत्यारों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट होने के बाद भी कार्रवाई न होना पुलिस की लापरवाही है। इसके जवाब में गृह राज्यमंत्री नागेन्द्र सिंह ने बताया कि जिस मोबाइल से उन्हें धमकी मिली थी, वह आगरा से गलत नाम और पते पर जारी हुए थे। अपराधी का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। मप्र पुलिस सक्षम है और पूरी गंभीरता से इस हत्याकांड की जांच कर रही है। हम आरोपियों को पकड़कर दिखाएंगे। यह सही है कि मृतक ने सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन हर व्यक्ति को सुरक्षा देना संभव नहीं है।
बहस में भाग लेते हुए भाजपा विधायक उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि नामजद रिपोर्ट होने और जान को खतरा होने की पूर्व सूचना देने के बाद भी एक पत्रकार की जान नहीं बचा पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हाही चाहिए, जबकि भाजपा के ही सुनील नायक का कहना था कि 'भय, भूख और भ्रष्टाचार, हम देंगे अच्छी सरकार' का नारा देने वाली सरकार के राज में आज पूरे प्रदेश में भय का वातावरण है। उन्होंने कहा कि हत्या के इस मामले को घुमाया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के रोकने और टोकने के बाद भी श्री नायक अपनी बात पूरी करने के बाद ही रुके।
कांग्रेस के अजय सिंह, राजनारायण सिंह पूरनी और माकपा विधायक रामलखन शर्मा ने पूछा कि जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ था, वह जमीन वर्धमान बिल्डर्स ने जिस उदय होम्स को बेची थी, उसके पार्टनर कौन हैं। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि उनके पास जयंत डागा नामक एक पार्टनर की जानकारी है। बाकी पार्टनरों की जानकारी लेकर दे देंगे। इस दौरान श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में संदेह जताया कि उदय होम्स में सीएम के एक नजदीकी रिश्तेदार और एक दोस्त शामिल हैं।
इस आरोप पर संसदीय कार्य मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने कड़ी आपत्ति की। कां्रग्रेस के बृजेंद्र सिंह राठौर और बसपा के डा. आईएमपी वर्मा ने जानना चाहा कि क्या संदिग्ध लोगों से पूछताछ के दौरान उनका लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाया था। इस पर गृह राज्यमंत्री ने कहा कि जब जरूरत पड़ेगी, तो उसका उपयोग किया जाएगा। कांग्रेस विधायक आरिफ अकील और सत्यदेव कटारे ने पार्टी लाइन से हटकर बात की, जबकि भाजपा विधायक ध्यानेंद्र सिंह तथा गिरिजा शंकर शर्मा ने इस गंभीर बहस को हल्का करने की कोशिश की।