नई दिल्ली: हरियाणा के साथ अपने विवादों को सुलझाने की जगह पंजाब और हवा दे रहा है। हांसी-बुटाना नहर का मसला अब वह सुप्रीम कोर्ट में ले गया है। पंजाब का कहना है कि इस नहर से उसके लिए बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। इस संबंध में गुरुवार को उसने याचिका भी दायर कर दी। पंजाब सरकार के वकील राजीव धवन ने यह कहकर मामले पर जल्द सुनवाई की अपील की कि मानसून आ चुका है। इस पर चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन की पीठ ने सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख तय कर दी।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस नहर के निर्माण को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि नहर निर्माण का विरोध करने वालों की असलियत से वे वाकिफ हैं। चीफ जस्टिस विजेंद्र कुमार जैन और जस्टिस महेश ग्रोवर की खंडपीठ ने आदेश पटियाला जिले के ल1गभग 40 गांवों के लोगों की याचिकाओं के संबंध में दिया था।
नई दिल्ली. अटार्नी जनरल मिलोन बैनर्जी द्वारा एसवाईएल नहर के निर्माण को लटकाने के लिए पंजाब द्वारा पारित विवादास्पद कानून की वैधता पर राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए संदर्भ पर सुनवाई टाले जाने का मामला आखिरकार केंद्र सरकार के दरबार में पहुंच गया है।
हरियाणा के सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने इस संबंध में जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज से मिलकर बैनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टाले जाने के आग्रह पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। हालांकि इस संबंध में वे खुद या राज्य सरकार आधिकारिक रूप से इस मसले पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, सिंचाई मंत्री की बुधवार को सोज के साथ हुई बैठक में यह मसला प्रमुखता से उठा। कैप्टन ने उन्हें बताया कि किस तरह इस मसले पर सुनवाई निरंतर टाले जाने से एसवाईएल नहर का बहुप्रतीक्षित निर्माण लटकता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही नहर का समयबद्ध निर्माण कराने का आदेश दे चुका है, लेकिन पंजाब की तत्कालीन अमरिंदर सिंह सरकार ने इस आदेश की अनुपालना के संवैधानिक दायित्व से बचने के लिए एकतरफा ढंग से विवादास्पद कानून पास करके त्रिपक्षीय जल समझौते रद्द कर दिए। विवादास्पद कानून को लेकर मचे हो हल्ले के बाद राष्ट्रपति ने इसकी वैधता को जांचने के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट को भेज दिया।
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए संदर्भ पर जल्द सुनवाई करने संबंधी अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की है। इसी माह 17 जुलाई को अपील पर सुनवाई के दौरान मिलोन बैनर्जी ने डेरा सच्चा सौदा प्रकरण के चलते मामले की सुनवाई टाले जाने की बात कही। केंद्र के इस अप्रत्याशित रूख से राज्य सरकार एकाएक सकते में आई और कैप्टन ने बुधवार को सोज से मिलकर बैनर्जी के रूख पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
सूत्रों का कहना है कि उन्होंने मामले की सुनवाई को डेरा प्रकरण से जोड़े जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, सोज ने इस संबंध में कानून मंत्रालय के एक अधिकारी से तभी फोन पर बात की और कहा कि यह मामला पहले ही तीन साल से लटका है लिहाजा इसे और लटकाना ठीक नहीं। उन्होंने कैप्टन को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को जल्द निपटाने के पक्ष में है।