चेन्नई :नासा ने कहा है कि रामेश्वरम के पास मिट्टी के टापुओं से बना प्राचीन एडम्स ब्रिज मानव निर्मित नहीं है, वरन प्राकृतिक रूप से बना हुआ है। इसके पास ही सेतुसमुद्रम शिपिंग चैनल प्रोजेक्ट (एसएससीपी) का काम चल रहा है। यह जानकारी सेतुसमुद्रम कॉरपोरेशन लि. के सीएमडी तथा तूतिकोरिन पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष एनके रघुपति ने शनिवार को यहां दी।
उन्होंने बताया कि परियोजना के एक अधिकारी ने 26 जुलाई को ई-मेल भेजकर नासा से कहा था कि वह उपग्रह सूचनाओं के आधार पर बताए कि एडम्स ब्रिज मानव निर्मित है या नहीं। इसके जवाब में नासा ने बताया है कि भारत और श्रीलंका को जोड़ने वाले छोटे-छोटे टापुओं से बना एडम्स ब्रिज विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम है, इन्हें किसी मानवीय गतिविधि द्वारा बनाए जाने के कोई सुबूत नहीं मिले हैं।
नासा का यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अनेक हिंदू संगठन तथा कुछ राजनीतिक दल रामार ब्रिज (रामसेतु या एडम्स ब्रिज) को ध्वस्त करने का यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इसे भगवान राम के लिए हनुमानजी तथा उनकी वानरसेना ने बनाया था। इनका दावा है कि नासा ने तस्वारें जारी करते समय बताया था कि यह पुल मानव निर्मित है।
रघुपति ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा मुद्दा उठाए जाने पर भी नासा ने स्पष्ट किया था कि एडम्स ब्रिज की तस्वीरें नासा की थीं लेकिन उनकी व्याख्या नासा ने नहीं की थी। नासा ने कहा था कि 'उपग्रह से ली गई तस्वीरें यह नहीं बता सकती हैं कि पुल मानव ने बनाया था या नहीं।' रघुपति ने सेतुसमुद्रम परियोजना की शनिवार सुबह छह बजे तक की प्रगति की जानकारी भी पत्रकारों को दी।
क्या है हमारी मान्यता :सीता के अपहरण के बाद भगवान राम को रावण की लंका तक पहुंचाने के लिए हनुमान तथा वानरसेना ने पत्थरों से इस सेतु का निर्माण किया था।