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राजधानी हरियाणा: दलितों के साथ ब्राrाणों को मिला अपने बूते पर यूपी में सरकार बनाने का करिश्मा कर चुकी बसपा के इस सोशल इंजीनियरिंग के अनूठे फारमूले को कांग्रेस ने हाथों हाथ लपक लिया है। इसी फामरूले को कैश करने के चक्कर में हरियाणा के शिक्षा मंत्री फूलचंद मुलाना को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष और कुलदीप शर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है। मुलाना दलित समुदाय से है, जबकि कुलदीप ब्राrाण हैं।
मायावती ने भी महामंत्री सतीश मिश्र से मिलकर यूपी में की इस सोशल इंजीनियरिंग के बलबूते पर ही सरकार बनाने में कामयाबी पाई है। मुलाना-कुलदीप को संगठन में अहम जिम्मेवारी सौंपने को कांग्रेस के बसपा के हरियाणा में असर को खत्म करने के रणनीतिक प्रयासों के तौर पर देखा जा रहा है। जिस तरह से पार्टी हाईकमान ने अध्यक्ष के साथ साथ कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है,उससे कांग्रेस की दूरगामी रणनीति की झलक मिलती है।
हुड्डा की पकड़ का परिचायक : मुलाना और कुलदीप को कांग्रेस संगठन में ताजपोशी मुख्यमंत्री हुड्डा की पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ का परिचायक है। कुलदीप की हुड्डा से निष्ठा जगजाहिर है। इसी तरह कभी पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के समर्थक रहे मुलाना की भी हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने के बाद आस्था बदल गई थी।
कुलदीप तो वर्ष 2004 में करनाल लोकसभा का टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा चुके हैं। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरने के कारण उनको कांग्रेस ने पार्टी से चलता कर दिया था। अब तीन साल के भीतर ही वे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं।
बसपा और भजन खेमे की हवा निकालने की कोशिश : कांग्रेस हाईकमान ने मुलाना व शर्मा को बना हुड्डा के विरोधी पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल व उनके सांसद बेटे कुलदीप बिश्नोई को भी संदेश दे दिया है। भजन खेमे की ओर से हुडडा सरकार में गैर जाटों की सुनवाई न होने का प्रचार किया जा रहा है। दो नेताओं को संगठन में बड़े पैदों पर बिठा कर कांग्रेस ने इस प्रचार की हवा निकालने की कोशिश की है।
मुलाना अंबाला जिले और कुलदीप करनाल जिले की नुमाइंदगी करते हैं। इन क्षेत्रों में बसपा का असर है। ऐसे में इन नेताओं को जिम्मेवारी सौंप पार्टी ने बसपा की जड़ों को कमजोर करने की कोशिश की है।
तीन बार मंत्री रह चुके हैं मुलाना अंबाला जिला के मुलाना विधानसभा क्षेत्र(सुरक्षित) का चार बार नेतृत्व कर चुके हैं। वह कांग्रेस सरकारों में तीन बार मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने 1982-83 तक राजस्व एवं वन विभाग का जिम्मा संभाला, 1986 से 1987 तक मुलाना पीडब्ल्यूडी एवं समाज कल्याण मंत्री रह चुके हैं। 1993-1996 और अब 2005 से सात तक वह शिक्षा मंत्री बने। हलका साढौरा की तहसील बिलासपुर के गांव मिल्क शेख में श्री शंकर लाल के घर जन्मे मुलाना ने अंबाला कचहरी में वकालत करते रहे हैं।
मुलाना में खुशी की लहर उधर हलका से आ रही प्रतिक्रियाओं में पंचायती राज सेल के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट कंवर पाल सिंह राणा ने इसे मान सम्मान की बात बताते हुए कहा मुलाना को अध्यक्ष बनाया जाना बड़े मान सम्मान की बात है। हलका मुलाना के कसबा बराड़ा निवासी कष्ट निवारण कमेटी अंबाला के सदस्य डॉ हरीश मौदगिल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देकर मुलाना ही नहीं अंबाला का भी मान-सम्मान बढ़ाया है।
चंद्रमोहन-रामप्रकाश विवाद पर नहीं की टिप्पणी नई दिल्ली. निवर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष डा. रामप्रकाश व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन के बीच क्रास वोटिंग मसले पर शुरू हुई मुकद्दमेबाजी पर सीधी टिप्पणी से बचते हुए मुलाना ने कहा कि बड़ी पार्टियों में यह सब चलता रहता है।
कड़ी का काम करूंगा : शर्मा करनाल। प्रदेश के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने माना कि वे इस पद पर आने के बाद कईयंो के निशाने पर हैं परंतु वे कार्यकर्ताओं व सरकार के बीच कड़ी का काम करेंगे। उनके कार्यकारी अध्यक्ष बनने से नान जाट राजनीति को बढ़ावा मिलेगा, ये बातें निराधार हैं।
कुलदीप शर्मा ने इस बात से साफ इन्कार किया कि उन्होंने कभी कांग्रेस नीतियों की आलोचना की है। इससे पूर्व कार्यकर्ताओं ने उनके मुख्यद्वार पर व पूजा गारमेंटस पर जोरदार स्वागत किया जिसमें कांग्रेस नेता राकेश नागपाल, देसराज गाबा, प्रदीप शर्मा व सैंकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
मुझे जख्म व टीस याद नहीं सन 2004 में कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद शर्मा के विरुद्ध आजाद उम्मीदवार के रूप में करनाल लोकसभा सीट से इलेक्शन लड़ने के बारे में शर्मा ने कहा कि उन्हें कोई जख्म या टीस याद नहीं है, जो बात गई सो गई। अरविंद शर्मा करनाल के सांसद हैं और मेरा काम अलग है। लेकिन बार बार कुरेदने पर उन्होंने इस सवाल का जवाब इस शेर से दिया। कि-लंबा सफर है दोस्त बना के चलो, दिल मिले न मिले, हाथ मिला के चलो। इस बात पर सभी हंसने लगे।