bhaskar Web English
HomeNewsMetrosIndore Indore

मुसीबत बना मंदिर विधेयक

shivraj singh chouhanप्रदेश विधानसभा में देवस्थान प्रबंधन एवं विकास विधेयक-2007 पेश होने से पहले ही यह शिवराज सरकार के लिए मुसीबत का सबब बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां पुजारियों ने इसकी कमान साधु-संतों के हाथ में थमाने के विरोध में मोर्चा खोल दिया है वहीं साधु-संतों ने विधेयक पर एक दर्जन से अधिक सवाल उठाए हैं।

सरकार के लिए परेशानी का सबसे बड़ा कारण यह है कि विधेयक के तहत प्रस्तावित मंडल की कमान किसे सौंपी जाए, साधु-संत, सेवानिवृत्त न्यायाधीश या सामाजिक कार्यकर्ता को। सूत्रों के मुताबिक साधु-संतों ने सरकार से साफ-साफ कह दिया है कि इसके लिए वेद-शास्त्रों के ज्ञाता साधु ही योग्य हैं।

साधु-संतों ने विधेयक के मसौदे के 18 बिंदुओं पर भी एतराज उठाया है। दूसरी ओर प्रदेशभर के पुजारी साधु-संतों को इसकी कमान सौंपने के खिलाफ खड़े हो गए हैं। बहरहाल विधेयक विधि विभाग के पास भेज दिया गया है।

विधेयक को लेकर उठे विवाद की गूंज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह तक भी पहुंच गई है। अभा पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने साधु-संतों के हाथों में मंदिरों का नियंत्रण नहीं देने का अनुरोध किया है।

क्या है विधेयक में विधेयक के तहत प्रदेश के सभी मठ-मंदिरों की व्यवस्था के लिए देवस्थान मंडल बनाने का प्रस्ताव है। इसका अध्यक्ष किसी साधु-संत, सेवानिवृत्त न्यायाधीश या सामाजिक कार्यकर्ता को बनाने का प्रस्ताव है।

20 हजार मठ-मंदिर होंगे अधीनमध्यप्रदेश में वैसे तो 80 हजार मठ-मंदिर हैं लेकिन इनमें से करीब 20 हजार से अधिक मठ-मंदिरों पर शासन का नियंत्रण हैं। विधेयक बनने के बाद इन पर देवस्थान मंडल का नियंत्रण होगा। महाकालेश्वर मंदिर व ओंकारेश्वर मंदिर सहित पांच प्रमुख मंदिर जिनके स्वतंत्र ट्रस्ट हैं वे इसमें शामिल नहीं हैं।(अभा संत समिति के प्रांतीय सचिव संत अवधेशदासजी के मुताबिक)

इसलिए पुजारियों का विरोध- विभिन्न मंदिरों के पुजारियों का शोषण होने की आशंका।- मंदिरों की व्यवस्था से पुजारियों को बेदखल किया जा सकता है।- साधु-संतों व पुजारियों के बीच विवाद उत्पन्न होंगे।


[an error occurred while processing this directive]