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इनका गुर जीने की कला

क्षेत्र कोई भी हो मार्गदर्शन की जरूरत तो पड़ती ही है। इसमें वे लोग भी हैं जो भगवा या श्वेत वस्त्र पहनकर पाद पूजा भले ही न करवाते हों पर उन्होंने अपने ज्ञान और मार्गदर्शन से कई लोगों का जीवन संवारा है। 'भास्कर' ने शहर में कुछ ऐसे ही गुरुओं से बात कर पाया कि वे अपने क्षेत्र में खूब उजाला फैला रहे हैं।

रोज दो-तीन को मार्गदर्शन करीब दस साल पहले रेलवे से रिटायर्ड इंजीनियर सुशीलकुमार कपूर से आज भी रोज दो-तीन फोन दिशा-दर्शन लेने के लिए आते हैं। कई इंजीनियर घर आकर भी मार्गदर्शन लेते हैं। वे कहते हैं हर व्यक्ति के अंतर्मन में ही गुरु हैं। बस हम उनके निर्देशों को समझ लें। उन्होंने कई पुल और चंबल के बीहड़ों में भी रेल लाइन डबल करने का चुनौतीभरा काम सहित सैकड़ों किलोमीटर पटरी बिछवाई है।

पिता ही गुरु शास्त्रीय गायिका और संगीत गुरु कल्पना झोकरकर कहती हैं मेरे पिता स्व. पं. कृष्णराव मुजुमदार (मामा मुजुमदार) ही गुरु थे, पिछले 16 वर्षो से गुरु पूर्णिमा पर उनकी तस्वीर रखकर पूजा करते हैं और सभी संगीत साधक शाम को करीब डेढ़ घंटे गायन करके हाजरी देते हैं। श्रीमती झोकरकर बताती हैं कि उनके दो गुरु और हैं- हैदराबाद के बसंत राजुरकर और मुंबई की डॉ. सुशीला पोहनकर। वे इन दोनों गुरुओं को गुरु पूर्णिमा पर हर साल फोन करके आशीर्वाद लेती हैं। इसी तरह उनकी शिष्याएं बैशाली बकोरे, कनकश्री भट्ट, आभा चौरसिया, विभा चौरसिया और गौतम काले भी उनसे आशीर्वाद लेते हैं। पीढ़ियों से गुरु-शिष्य परंपरा उनके घर चली आ रही है। उनके पिता मामा मुजुमदार रज्जब अली खां के शिष्य थे।

अब भी सिखा रहे हैं गुर विधिवेत्ता गुलाबचंद कासलीवाल कानून के ऐसे गुरु हैं, जिनके मार्गदर्शन में कई ने शोध कार्य किए और अध्ययन व लेखन से नई ऊंचाइयों तक पहुंचे। 92 वर्ष की उम्र में भी वे कानून के गुर सिखा रहे हैं। उनके शिष्यों में कई जज, कामयाब वकील और कानून के व्याख्याता हैं। वे कहते हैं मैं कोई गुरु नहीं। उन्होंने अमेरिका की कार्नेल यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ द साइंस ऑफ लॉ किया। उन्होंने इंग्लैंड में भी उच्च शिक्षा हासिल की। वे 1942 से 1946 तक सर सेठ हुकमचंद के सचिव भी रहे। आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज के प्रिंसिपल रहे श्री कासलीवाल कहते हैं आधुनिक समय में गुरु को लोग समय भले ही कम दें पर सम्मान कायम है।

सभी को मिलता है दिशा दर्शन राजनीति के महागुरु होमी एफ. दाजी यह स्वीकार नहीं करते कि वे किसी के गुरु भी रहे हैं, पर लोग जानते हैं कि उनके पास राजनीतिक गुर सीखने के लिए सभी दल के प्रादेशिक और राष्ट्रीय नेता आते रहे हैं। शहर को उनके मार्गदर्शन से करीब 15 पार्षद और विधायक मिले हैं। उन्हीं के शिष्य पूर्व पार्षद सोहनलाल शिंदे की मानें तो श्री दाजी से पूर्व गृहमंत्री इंद्रजीत गुप्त और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री चतुरानन मिश्र ने भी कई बार मार्गदर्शन लिया। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी दाजी को राजनीतिक गुरु मानते हैं।


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