बिजली सामान खरीदी में एक करोड़ रु. की गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन कांग्रेस महापौर मधुकर वर्मा, निगमायुक्त संजय शुक्ला, आडिटर, सप्लायर्स सहित 16 के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस ने चालान पेश किया। मामले में सिर्फ मधुकर वर्मा कोर्ट में उपस्थित हुए जिन्हें जमानत मिली। बाकी की ओर से उनके अभिभाषक पेश हुए। अगली तारीख 4 अगस्त दी गई है।
1999 में निगमायुक्त की अनुशंसा पर सवा दो करोड़ रु. की बिजली फिटिंग खरीदी के ऑर्डर चार निजी कंपनियों चिनार कॉमर्स प्रा. लि. (क्राम्पटन ग्रीव्स की स्थानीय डीलर कंपनी), अरिहंत ट्रेडर्स, रजत सेल्स कॉपरेरशन और संदीप ट्रेडिंग को सौंपे गए थे। इनमें ढाई करोड़ का बिजली सामान खरीदा जाना था जिसमें से सवा दो करोड़ रु. का खरीदा गया। इस सवा दो करोड़ रु. की खरीदी में से आधा तो मिला ही नहीं था। बाद में मामला लोकायुक्त तक पहुंचा और जांच शुरू हुई।
वर्ष 2003 में विवेचना के बाद लोकायुक्त पुलिस ने साक्ष्य नहीं मिलने से मामले का खात्मा कर दिया। इसके बाद भाजपा के एक पूर्व पार्षद की याचिका पर हाईकोर्ट ने फिर लोकायुक्त पुलिस को नए सिरे से जांच के आदेश दिए। शनिवार को लोकायुक्त पुलिस ने विशेष न्यायाधीश एम. शमीम की कोर्ट में तत्कालीन महापौर मधुकर वर्मा, निगमायुक्त संजय शुक्ला, मुख्य अभियंता आर.के. सिंह कुशवाह, अभियंता बी.एस. द्विवेदी, जी.आर. दुबे, पूर्व सचिव बंसीलाल जोशी, स्टोर इंचार्ज ओ.पी. दुबे, आडिटर अरुण शुक्ला, डी.एल. कनेरिया, एम.एस. तोमर, सप्लायर्स संदीप जैन, प्रिया जैन, राजेश जैन, प्रदीप जैन, भंवरलाल जैन तथा क्रॉम्प्टन ग्रीव्स के अधिकारी पार्थ बैनर्जी के विरुद्ध चालान पेश किया।