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नई दिल्लीजब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं तब प्रधानमंत्री कार्यालय में फ्रेंच इंटेलीजेंस की घुसपैठ थी और इसका पता 1985 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद चला।
इस अध्याय का खुलासा किया गया है पूर्व टॉप इंटेलीजेंस अधिकारी बी रमन की नई किताब द काउबॉयज ऑफ रॉ में। किताब में कहा गया है कि इस बात पर पूरी दुनिया को हैरानी हुई थी कि प्रधानमंत्री कार्यालय में पोलेंड के जासूसों की मदद से फ्रांस के दो इंटेलीजेंस अफसर न केवल बड़ी ही सरलता से पहुंचे बल्कि उन्होंने ढेर सार दस्तावेज भी वहां से हासिल किए।
रमन ने लिखा है कहा जाता है कि दोनों फ्रेंच जासूसों को किसी किस्म के खतर का डर नहीं था और वे रविवार व अन्य छुट्टियों के दिन प्रधानमंत्री कार्यालय जाकर फाइलों व दस्तावेजों की पीएमओ की ही मशीन से फोटोकॉपी निकालते थे। यह वाकई आश्चर्यजनक घोटाला था।
जल्द ही रणनीति के थिंक टैंक साउथ एशिया एनालिसिस ग्रुप की वेबसाइट पर प्रकाशित होने वाले एक आलेख में रमन ने लिखा है कि इस बेहद आश्चर्यजनक घपले की वजह से राजीव गांधी को संसद में सफाई देना पड़ी और इंदिरा गांधी के प्रमुख सचिव पीसी अलेंक्जेंडर को इस्तीफा देना पड़ा था।
इस मामले की जांच में पता चला था कि फ्रेंच और अन्य इंटेलीजेंस एजेंसियों के अफसर मुंबई की माणिकलाल इंडस्ट्री लि. के तत्कालीन एमडी योगेश टी माणिकलाल के सहयोग से घुसपैठ बनाने में कामयाब हुई थीं। पीएमओ के निचले स्तर, राष्ट्रपति कार्यालय और अन्य मंत्रालयों में माणिकलाल के अच्छे संपर्क थे और उसी ने फ्रेंच जासूसों की मदद के लिए कई सरकारी कर्मचारियों को विश्वास में लिया था।