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उलट गया धान का कटोरा

रायपुर: छत्तीसगढ़ की धान के कटोरे वाली पहचान अब खत्म होती जा रही है। धान का उत्पादन तेजी से बढ़ाने वाले देश के छह राज्यों ने छत्तीसगढ़ को पछाड़ दिया है। हालात इतनी तेजी से बदले हैं कि दो दशक पहले जिन राज्यों में धान का उत्पादन नहीं के बराबर था, वही छत्तीसगढ़ से आगे निकल गए।

विश्व में धान की कुल पैदावार का 29.6 फीसदी हिस्सा भारत में होता है। देश के 448 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। उत्पादन का विश्लेषण किया जाए, तो देश में धान के उत्पादन का 70 फीसदी हिस्सा छह राज्यों में सिमट गया है।

जानकारों के अनुसार इनमें पंजाब, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडू, कर्नाटक, हरियाणा व उत्तरप्रदेश हैं। इन राज्यों में लगभग 90 फीसदी क्षेत्र सिंचित हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में सिंचाई सुविधा कम है। इसके बावजूद यहां उत्पादन काफी बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ इन सबसे पिछड़ चुका है।

राज्य सरकार के कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि राज्य बनते समय करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान बोया जाता था। यह कम होकर 34.7 लाख हेक्टेयर में पहुंच गया। छत्तीसगढ़ उत्पादन में भी काफी पीछे जा चुका है। यहां प्रति हेक्टेयर 15.8 क्लिंटल धान उत्पादन होता है। राष्ट्रीय औसत 22.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

विशेषज्ञों ने बताया कि उत्पादन कम होने की एकमात्र वजह सिंचाई है। एक किलोग्राम धान उगाने के लिए 1800 से 2500 लीटर पानी जरूरी है। किसानों के मुताबिक मानसून की बारिश ने भी छत्तीसगढ़ का साथ छोड़ दिया है। पिछले कुछ सालों में औसत बारिश घटी है।

हालात बदल गए गोमची के जाने-माने किसान तथा खेती में डाक्टरेट हासिल कर चुके नारायण चावड़ा बताते हैं कि 50 साल पहले छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार पर नजर डालें, तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगा। देश में मौसम चाहे जैसा हो, अकाल के हालात हों फिर भी छत्तीसगढ़ के खेत धान की सुनहरी बालियों से दमकते रहते थे। अब हाल ये है कि पंजाब जैसा राज्य, जहां के लोग धान को ठीक से जानते नहीं थे, वह सबसे ज्यादा पैदावार ले रहा है।

फिर भी अलग पहचान कृषि विभाग के संचालक प्रतापराव कृदत्त का मानना है कि खरीफ सीजन में 76 फीसदी क्षेत्र धान का होता है। भले ही दूसरे राज्य आगे हो गए हों, लेकिन धान का कटोरा यहां की अलग पहचान है। इसे बचाने के लिए कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन देने वाले प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करना होगा।

कोर्स से भी गायब प्राइमरी कक्षा में पहले छत्तीसगढ़ धान का कटोरा नाम से एक पाठ होता था। अब इसे हटा दिया गया है। अब चौथी कक्षा के पर्यावरण भाग-2 में केवल एक लाइन लिखी गई है कि छग के मैदानी इलाके में धान अधिक होता है, इसलिए इसे धान का कटोरा कहते हैं।

बीज दूसरे राज्यों से हजारों किस्में पैदा करने वाले छत्तीसगढ़ के किसान अब अच्छे बीजों के मोहताज हैं। पंजाब जैसे राज्य धान विदेशों को एक्सपोर्ट करते हैं। हमारा राज्य बीज के लिए दूसरे राज्यों को तकने लगा है। जबकि राज्य में धान की सर्वाधिक किस्में पाई जाती हैं। यहां धान के तकरीबन 23536 किस्म के जर्मप्लाज्म हैं। यहां के धान की खासियत ही अलग है। कई किस्में सुगंधित हैं जिनमें दुबराज, तुलसी माला, तुलसी मंजरी, डोकरा-डोकरी और साखिया आदि हैं। इनमें खूशबू तो है ही, प्रोटीन की मात्रा भी आम चावल से दोगुनी है।

पहचान बन गई धारणा छग को धान का कटोरा क्यों कहते हैं? यह सवाल कई वर्ग से पूछा गया। जिसमें अधिकारी, शिक्षक से लेकर किसान शामिल थे। लेकिन उन्होंने अलग-अलग बातें कहीं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के डीन डा. बीएस ठाकुर का मानना है कि सरगुजा और बस्तर में पहाड़ है। जबकि बीच का क्षेत्र मैदान है। भौगोलिक दृष्टि से यह कटोरानुमा है। बीच में केवल धान की खेती होती है। इसलिए इसे धान का कटोरा कहते हैं।

राज्य क्षेत्रफल उत्तरप्रदेश 58.4 लाख पश्चिम बंगाल 54.4 लाख उड़ीसा 44.9 लाख आंध्रप्रदेश 40.3 लाख बिहार 36.8 लाख पंजाब 26.1 लाख छत्तीसगढ़ 34.5 लाख (नोट- तमिलनाडु और कर्नाटक में भी धान क्षेत्रफल अधिक है। इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हो सके।)


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