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Raipur Raipur रायपुर: युवाओं के व्यक्तित्व में तनाव की लकीरें ग्रहण की तरह होती हैं। अग्रसेन इंटरनेशनल कालेज में शनिवार को छात्रों के लिए आयोजित सेमिनार में इससे बचने की तीन शर्त्े बताई र्गई। जेसीआई के ट्रेनर शरद अग्रवाल ने छात्रों को बताया कि रहना, कहना और सहना सीख जाने वाले व्यक्ति के जीवन में तनाव जैसी कोई बात नहीं आ सकती।
हर व्यक्ति में एडजस्ट करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। वह जिस स्थान पर रहता हो या काम करता हो, वहां उसे तालमेल बिठाकर चलना है। माहौल में ढल जाने पर ही बेहतर परिणाम मिलते हैं। उसी तरह जिव्हा पर खुद का नियंत्रण होना चाहिए। एक शब्द दुश्मन को दोस्त और दोस्त को दुश्मन बना सकता है। हमारा हर वाक्य नपे-तुले शब्द और अर्थो के साथ सामने वाले तक पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए। तीसरी बात आती है, सहने की।
हर बात में यह विचारकर चलना चाहिए कि यह तो होता रहता है। किसी की बात का इतना बुरा भी नहीं मानना चाहिए कि उसके साथ संबंध ही खराब हो जाएं। सहने की प्रवृत्ति ही अच्छे व्यकितत्व के धैर्य की परीक्षा लेती है। लगभग दो घंटे के सेमिनार में ट्रेनर ने छात्रों को खेल-खेल में रोचक जानकारियां देते हुए व्यक्तित्व विकास की बारीकियां बतरई।
तराशे जाने का दर्द सहा.. जेसीआई के अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर राजेश अग्रवाल ने छात्रों को बताया कि व्यक्तित्व का सबसे बड़ा पहलू स्वयं का महत्व बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि मूर्ति भगवान का स्वरूप होने के कारण नहीं पूजी जाती, बल्कि वह इसलिए पूजनीय होती है, क्योंकि उसने तराशे जाने का दर्द सहा होता है। अगर तुम्हें भी समाज में अपने लिए स्थान बनाना है, तो सहना होगा, तराशे जाने का दर्द सहना होगा और त्याग करना होगा।
चिंता कैसे ना करें सेमिनार के बाद छात्रों ने ट्रेनर से प्रश्न किया कि आप कहते हैं कि चिंता मत करो, लेकिन पढ़ाई के बारे में सोचना और लक्ष्य प्राप्ति के लिए चिंता तो करनी ही पड़ती है। श्री अग्रवाल ने कहा कि चिंता करो, लेकिन उसे अपनी चिता मत बनाओ। पाजिटिव सोच के साथ अपने लक्ष्य को भेदने की कोशिश करनी चाहिए, न कि उसे पाने की कोशिश में चिंता करके सूख जाएं।
कब तक सहा जाए ट्रेनर ने गुस्से को काबू में रखने और सब कुछ सहने को कहा। इस पर छात्रों ने प्रतिक्रिया जताई कि कोई बहुत अधिक परेशानी का शबब बन जाए, तब भी उसे सहना चाहिए। इस पर श्री अग्रवाल ने कृष्ण और शिशुपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भगवान ने सौ गलती माफ करने के बाद शिशुपाल को माफ नहीं किया तो, हम सिर्फ इंसान हैं.। इस तरह छात्रों ने प्रश्नोत्तर राउंड में तरह-तरह के प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाएं शांत कीं।
ये थे उपस्थित सेमिनार में कालेज के डायरेक्टर जीपी श्रीवास्तव, एडमिनिस्ट्रेटर समीर ठाकुर आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर कार्यक्रम में अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिया गया। कालेज के प्राध्यापक भी इसमें शरीक हुए।