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रंगमंदिर मामले की जांच

रायपुर: ऐतिहासिक आडिटोरियम रंगमंदिर का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। प्रेक्षागृह का संचालन एक समिति कर रही है। राज्य के रंगकर्मियों को अंदेशा है कि रंगमंदिर की जगह व्यावसायिक परिसर बनाया जा सकता है। इसे लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी है।

दैनिक भास्कर ने रंगमंदिर के संरक्षण और रंगकर्मियों की चिंता को प्रमुखता से उभारा था। इस आधार पर कलेक्टर विकास शील ने पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए। नजूल अधिकारी सीएल यादव को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे रंग मंदिर का संचालन करनेवाली समिति के पदाधिकारियों के अलावा इसे बचाने के लिए जुटी संस्थाओं और रंगकर्मियों के बयान भी लेंगे।

रंगमंदिर परिसर में संचालित कमला देवी संगीत महाविद्यालय को गुरुकुल परिसर में ले जाने से विवाद शुरु हुआ है। समिति के संस्थापक सदस्यों व रंगकर्मियों को अंदेशा है कि वहां व्यावसायिक परिसर बनाया जा सकता है, क्योंकि जमीन काफी कीमती है। उनका कहना है कि इसी वजह से भातखंडे ललित कला शिक्षा समिति गुपचुप तरीके से काम कर रही है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री से राजधानी के रंगकर्मियों और बुद्धिजीवियों की आठ अलग-अलग समितियों ने इस मामले की शिकायत की है।

सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल ईएसएल नरसिंहन के उपसचिव डा. राजेश गुप्ता ने इसकी जांच एवं आवश्यक कार्यवाही के लिए कलेक्टर को भेजा। कलेक्टर ने इस आधार पर जांच के निर्देश जारी कर दिया है। शिकायती पत्र में कहा गया है कि षडयंत्र के तहत संगीत महाविद्यालय को स्थानांतरित किया जा रहा है। इसलिए समिति को भंग कर उचित कार्यवाही (दंड) किया जाए। इसकी शिकायत सोसाइटी एवं फर्म के रजिस्ट्रार से भी की गई है।

सूत्रों के मुताबिक समिति के नाम पर दो भूखंड हैं। बैजनाथपारा स्थित ब्लाक नंबर 102 का प्लाट 38083 वर्गफीट का है। इसी में रंगमंदिर और संगीत महाविद्यालय का भवन है। दूसरी जमीन कालीबाड़ी में 75307 वर्गफीट है। यह शासकीय जमीन शैक्षणिक एवं क्रीड़ा प्रयोजन के लिए समिति को न्यूनतम दर पर दी गई। समिति में अभी 17 सदस्य हैं। इनमें से ज्यादातर व्यवसायी हैं।

पता नहीं, बनेगा क्या? समिति के संस्थापक सदस्यों का आरोप है कि संगीत महाविद्यालय को इसीलिए स्थानांतरित किया गया, ताकि परिसर में निर्माण कार्य कराए जा सकें। मामला उजागर होने के बाद समिति इसे दबाने में लगी हुई है। वे कभी इसे अंतरराष्ट्रीय आडिटोरियम बनाने की बात कहते हैं तो कभी शोध संस्थान। जानकार सूत्रों का कहना है कि समिति यहां पर ज्वेलरी पार्क बनाना चाहती है। इसे लेकर राजधानी के बुद्धिजीवी, रंगकर्मी और वरिष्ठ नागरिक विरोध कर रहे हैं।

रंगकर्मियों की इच्छा बुद्धिजीवियों और रंगकर्मियों की संस्था प्रयास के सदस्यों का कहना है कि रंगमंदिर परिसर की जान संगीत महाविद्यालय है। इसे अतिशीघ्र उसके मूल स्थान पर लाया जाए। उनका कहना है कि यदि वहां किसी तरह का व्यावसायिक परिसर बनाया जाता है तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग की जानकारी के बिना कमला देवी संगीत महाविद्यालय को स्थानांतरित करना नियम विरुद्ध है। संगीत महाविद्यालय को स्थानांतरित करने की वजह से छात्र प्रवेश नहीं ले रहे। उनमें डर है कि कहीं महाविद्यालय बंद न हो जाए।


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