इंदौर. हाई कोर्ट द्वारा निचली अदालतों के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए गठित विजिलेंस टीम ने शनिवार को डीजे जबलपुर के सिविल रीडर को रिश्वत लेते हुए पकड़ा। उन्होंने नकल देने के लिए एक वकील से तीन सौ रुपए मांगे थे। अफसरों को देखते ही रीडर ने नोट अलमारी में छुपा दिया। जबलपुर के वकील संदीप तिवारी ने 25 जुलाई को एक मामले की नकल के लिए आवेदन दिया था। नकल के लिए जिला न्यायधीश के सिविल रीडर पी.एस. राणा ने उनसे तीन सौ रुपए की मांग की। श्री तिवारी ने इसकी शिकायत जिला न्यायधीश सतर्कता बी.के. पालीवाल को की।
राणा को रंगे हाथों गिरफ्तार करने के लिए शनिवार को योजना बनाई गई। 100 रुपए का एक नोट लेकर उसका पंचनामा बनाया गया। यह नोट श्री तिवारी को सौंप दिया गया, जिसे लेकर वे राणा के पास पहुंचे। मोलभाव के बाद राणा 100 रुपए में नकल देने के लिए तैयार हो गए। रुपए लेकर वे फाइल उठाने के लिए बढ़े ही थे कि श्री पालीवाल वहां पहुंच गए। उन्हें देखते ही राणा ने नोट को अलमारी में ही छुपा दिया। हालांकि बाद में नोट जब्त कर लिया गया। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के.सी. शर्मा ने बताया राणा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
विजिलेंस टीम के चौथे शिकार राणा विजिलेंस टीम के चौथे शिकार हैं। इसके पहले बुरहानपुर में दो बाबू रिश्वत लेते पकड़े गए थे। अपर जिला न्यायालय ग्वालियर में भी एक बाबू पकड़ा गया था। उसे नौकरी से निकाल दिया गया है।