इंदौर: देशभर के मौसम केंद्रों को नई टेक्नोलॉजी से अपडेट करने की कड़ी में भोपाल में भी डॉपलर रडार लगाया जाएगा। इससे प्रदेश के 400 किमी का क्षेत्रफल स्कैन होगा। इससे बादलों का घनत्व और पानी की मात्रा, दूरी, बरसने का स्थान और कितना पानी बरसेगा, यह आकलन किया जा सकेगा।
सभी जिला मुख्यालयों में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। इसी तरह तहसील स्तर पर लगभग 135 रेनगेज स्टेशन लगाए जाएंगे। यह तापमापी और वर्षामापी का काम करेगा। यह सभी सैटेलाइट से जुड़े होने के कारण भोपाल से इसकी मॉनीटरिंग होगी। मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. डी.पी. दुबे ने बताया इससे प्रदेशभर के मौसम में समानता और बदलावों का अनुमान लगाया जा सकेगा। किसानों को इससे काफी सहूलियत होगी।
हर बार गलत साबित हुआ अनुमान — मई में घोषणा हुई थी इस बार मानसून 11-13 जून के बीच आ जाएगा लेकिन 28 जून को मानसून आया। —मुंबई में मानसून 48 घंटे में दस्तक देगा, लेकिन उसके छह दिन तक बारिश नहीं हुई थी। — लंबी खेंच के बाद अगस्त में बारिश की संभावनाएं बताई गई थीं लेकिन 24-25 जुलाई को रिमझिम होती रही।