HomeNewsNational National

नेताओं ने कुछ नहीं किया 60 साल में : हफीज

यह देश यहां के लोगों पर चल रहा है, नेताओं पर नहीं। नेताओं ने कुछ नहीं किया है इस देश के लिए। अगर 60 साल की आजादी के बाद भी इस देश की आधी जनता के पास घर नहीं है तो इसकी वजह हैं नेता। इन्हें मुफ्त में घर मिलता है इसलिए ये नहीं जानते कि घर की अहमियत क्या होती है और कितनी मुश्किल से यह खड़ा होता है। यह कहना है जाने माने आर्कीटैक्ट हफीज कॉन्ट्रेक्टर का। आजादी के बाद इन 60 सालों में देश कहां खड़ा है और आगे क्या भविष्य उन्हें दिखता है, इस बारे में हफीज से बात की भास्कर ने। पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश..

आपकी नजर में टर्निग प्वाइंट कौन से रहे हैं इन 60 सालों में?मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा अहम बात हुई है आईटी मूवमेंट और ढेर सारी इंडस्ट्रीज का खड़ा होना। यह एक ऐसी चीज है, जिसने भारत की छवि को ही बदलकर रख दिया है। पहले हम अमेरिका जाते थे तो हमारी कोई वकत नहीं थी। अब जाते हैं तो हमारा सम्मान होता है क्योंकि हमारे यहां के इंजीनियर्स, प्रोग्रामर्स, प्रोफेशनल्स उनकी रीढ़ की हड्डी की तरह हैं।

इन 60 वर्षो में घरों में लोगों को जरूरत की चीजें तो मिली हैं लेकिन आबादी बढ़ने की वजह से बड़ी तादाद में लोगों को घर नहीं मिल पाया?ये जो अपन लोगों ने कानून बनाए हैं, उनकी वजह से। हमें वक्त के साथ साथ नए शहरों के विकास को देखते हुए नए तौर तरीकों के बारे में सोचना चाहिए था। नए रास्ते निकालने चाहिए थे, नए वर्किग स्पेस बनाने चाहिए थे। लेकिन हमने किया क्या है? हम गांव खा रहे हैं और उन्हें शहरों में तब्दील कर रहे हैं। हमें ऐसे कानून चाहिए जो पुराने शहरों को फिर से रहने लायक बना सकें, उन्हें पुनर्जीवन दे सकें।

पिछले 50 सालों में इतनी तेजी से रियल इस्टेट की कीमतें नहीं बढ़ी थीं कि अब बाद के 10 सालों में बढ़ गई हैं। आजादी के बाद आधी सदी बीत जाने के बाद भी हर परिवार के पास घर नहीं है। इसके पीछे किसे वजह मानते हैं?हमारे नेताओं और सरकारी अफसरों को। सरकारी अफसर, मंत्रियों को पता ही नहीं है कि अपना घर बनाना कितना मुश्किल हो गया है। उनसे फ्री हाउसिंग छीन लो तो उन्हें पता चलेगा कि यह कितना मुश्किल काम है। चूंकि वे खुद मुफ्त में घरों में रहते हैं तो उन्हें किसी कानून को बनाने की जरूरत ही महसूस नहीं होती। 110 करोड़ की आबादी वाले इस देश में आधों के पास भी अपना घर नहीं है तो इसके लिए जिम्मेदार ये नेता, अफसर और मंत्री हैं। अगर कोई अपना घर लेना चाहता है तो उससे कहा जाता है कि पहले अपने मां बाप को बेचकर आ। वरना किस्तें तो चुका नहीं पाएगा वह।

कौन से ऐसे कानून बनाए जाने चाहिए कि आम आदमी को घर मिल सके?दरअसल छोटी छोटी चीजों के सरकारीकरण की वजह से घर बनाने या खरीदने की प्रक्रिया जटिल हो गई हैं। रियल इस्टेट की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं क्योंकि इंडस्ट्रियलाइजेशन हो रहा है तेजी से। नई कंपनीज आ रही हैं। अब अपने घर के लिए जमीन हासिल करना या घर बनाना काफी मुश्किल है। घर बनाने की कीमत ज्यादा नहीं है, लेकिन सरकारी फाइलों के इधर से उधर होने में जो पैसा खर्च होता है, उससे उसकी कीमत बढ़ जाती है। ढेरों ऐसे क्लॉज लगा दिए जाते हैं कि लोग इन्हें पूरा करते करते परेशान हो जाते हैं। 25 से 35 बरस का ईएमआई देते देते कमर झुक जाती है आदमी की। क्योंकि हमारे नियम कानून ऐसे हैं कि उनमें लोग उलझकर रह जाते हैं। इस तरह देखें तो हम खुद अपने ही लोगों की हत्या कर रहे हैं। उनकी इच्छाओं और तमन्नाओं का गला घोंट रहे हैं।

हफीज कॉन्ट्रेक्टरहफीज कॉन्ट्रे्क्टर ने टी खरेघाट के साथ अप्रेंटिस आर्कीटैक्ट के बतौर 1968 में अपना कैरियर शुरू किया था। 1977 में वह इसी फर्म में एसोसिएट पार्टनर बन गए। 1982 में उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की और इसके बाद उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। 1977 से 1980 के बीच हफीज अकेडमी ऑफ आर्कीटैक्चर मुंबई में विजिटिंग फैकल्टी के बतौर काम करते रहे। वह बॉम्बे हैरिटेज कमेटी के सदस्य और नई दिल्ली स्थित लुटयेन्स बंग्ला जोन रिव्यू कमेटी के सदस्य हैं। देश भर में कई अहम प्रोजेक्ट हफीज कॉन्ट्रेक्टर के नाम रहे हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: