मुंबई
जैसा संजय दत्त की या दीगर बंबइया फिल्मों में होता है, वैसा कतई नहीं हुआ। करोड़ों दुआएं और मुजरिम की दुहाई, एक न सुनी गई और अदालत ने संजय को 14 साल बाद छह साल की बामशक्कत कैद और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुना दी। संजय को 93 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट में आम्र्स एक्ट के तहत कसूरवार करार दिया गया था।
टाडा कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद संजय ने समर्पण के लिए कोर्ट से थोड़ा वक्त मांगा जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और उन्हें ऑर्थर रोड जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए उन्हें तीन महीने दिए गए हैं।
बेटी से कर सकेंगे बात
टाडा कोर्ट ने संजय की जमानत याचिका भी खारिज कर दी, उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि उन्हें मुंबई से बाहर न भेजा जाए। अब उनकी इस अपील पर 2 अगस्त को सुनवाई होगी। सजा सुनाए जाने के बाद संजय ने अमेरिका में रह रही अपनी पुत्री त्रिशाला से बात करने की इच्छा जाहिर की जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
अब सुप्रीम कोर्ट का सहारा :
कोर्ट द्वारा मुकर्रर की गई सजा के खिलाफ अब संजय दत्त सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए संजय को तीन महीने का समय दिया गया
कितनी सजा काटनी होगी संजय दत्त पहले ही 16 महीने की सजा काट चुके हैं इसलिए अगर सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिलती है तो संजय दत्त को 4 साल 8 माह और जेल में गुजारने होंगे।
क्या थी दलील : संजय ने पुलिस को दिए गए बयान में कहा था कि मुंबई बम धमाकों के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं। अपने परिवार की हिफाजत के लिए उन्होंने एके-56 राइफल अपने पास रख ली थी। रूसी मुल्ला, करसी अदजानिया और नलवाला को राइफल नष्ट करने का दोषी पाया गया था।
रहम.. मीलॉर्ड!संजय कटघरे में हाथ बांधे आए। उन्होंने जज से कहा, 'सर, मैंने 14 साल पहले एक गलती की थी। मुझे समर्पण करने के लिए कुछ वक्त देने की कृपा करें।' गौरतलब है कि संजू को आम्र्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। संजू ने अबू सलेम और उसके साथी से हथियार लेकर अपने घर रखे थे। मुंबई विस्फोट के बाद उन्होंने हथियार हटा दिए।
'सौ साल तक एक्टिंग करो मैंने तो तुम्हारे सिर्फ छह साल लिए हैं'मैकेनाज गोल्ड में जिस कलाकार ने काम किया था, उसका नाम मुझे याद नहीं आ रहा है। यस पेक। वह सौ साल तक काम कर रहा था तुम भी वैसा कर सकते हो। मैंने तुमसे सिर्फ छह साल ले लिए हैं। तुम्हारे फील्ड में तुम नंबर वन हो और खुद पर भरोसा रखो। तुम जानते हो कि उस वक्त क्या हुआ और मैंने अपना फर्ज निभाया है। तुम सुप्रीम कोर्ट जा सकते हो और वहां पर तुम्हारे लिए लड़ने के लिए वकीलों की फौज है।
—पीडी कोडे, जज, टाडा कोर्ट