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पुलिसकर्मी गिरफ्तारी वारंट से तलब

अलवर/ चूरू: फर्जी दस्तावेज से पुलिस में नौकरी पाने के मामले में पुलिस द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं देने के कारण अपर सेशन न्यायालय ने मामले के मुख्य गवाह पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया है। साथ ही प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रदर्शित कर प्रकरण का पुन: निस्तारण करने के आदेश दिए हैं। अपर सेशन न्यायाधीश डी.पी. शर्मा ने पुलिस कांस्टेबल पृथ्वीसिंह राजपूत की तरफ से पेश अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिए हैं।

ग्रार्म इयारा तहसील सुजानगढ़ जिला चूरू निवासी कांस्टेबल पृथ्वीसिंह को नौकरी में फर्जी कागजात पेश कर पुलिस की नौकरी हथियाने के आरोप में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बी.बी. गुप्ता ने 17 नवम्बर 05 को धारा 420, 467, 468व 471 में दोषी मानते हुए तीन वर्ष का कारावास तथा चारों धाराओं में 6 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस आदेश को पृथ्वीसिंह ने सेशन न्यायालय में अपील दायर कर चुनौती दी थी। इस पर न्यायालय ने पूरे मामले की पुन: जांच कराने के आदेश दिए।

मामले के अनुसार अभियुक्त पृथ्वीसिंह के खिलाफ उपमहानिरीक्षक पुलिस जयपुर रेंज प्रथम को एक शिकायत प्राप्त हुई थी कि पृथ्वीसिंह ने फर्जी कागजात पेश कर पुलिस में नौकरी हथिया ली है। दस्तावेजों की जांच करने पर सभी प्रमाण-पत्र फर्जी मिले। इस पर थाना बनीपार्क जयपुर में मुकदमा दर्ज किया गया। चूंकि पृथ्वीसिंह की भर्ती अलवर में 1995 में हुई थी, इसलिए प्रकरण को अलवर एसपी के पास भेजा गया। इस मामले में शहर कोतवाली को अभियोग दर्ज कर अनुसंधान करने के निर्देश दिए गए।

न्यायालय ने अभियोजन को 19 अवसर साक्ष्य पेश करने के लिए दिए लेकिन पुलिस का सहयोग ना मिलने के कारण प्रकरण के मुख्य गवाह थानाधिकारी, अनुसंधान अधिकारी जयपुर व अलवर न्यायालय में साक्ष्य के लिए उपस्थित नहीं हुए। साथ ही न्यायालय के आदेशों के बावजूद मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई। इस बारे में पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखे गए थे। इस मामले में अब अपर सेशन न्यायालय ने प्रकरण के मुख्य गवाहों को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया है।