
भारत के दक्षिण में स्थित गोवा अपने समुद्री किनारों के कारण दुनिया भर में विख्यात है। इतिहास में सबसे पहले महाभारत में गोआ का वर्णन मिलता है। इस समय इसे गोपराष्ट्र या गाय चराने वालों का देश कहा जाता था। ऐसा माना जाता है कि इस प्रदेश की रचना भगवान परशुराम ने की थी।
उन्होंने अपने बाणों से समुद्र को काफी पीछे धकेल दिया था। उत्तरी गोवा में हरमल के पास भूरे रंग का एक पर्वत है जिसे भगवान परशुराम के यज्ञ करने का स्थान माना जाता है।
प्रशासनिक दृष्टि से गोआ को दो भागों में बांटा गया है। उत्तरी गोआ और दक्षिणी गोआ। उत्तरी गोआ का मुख्यालय पणजी है जबकि दक्षिणी गोआ का मुख्यालय मडगांव में है। गोआ को पर्यटकों का शहर कहा जाता है। देशी और विदेशी बड़े पैमाने पर यहां आते हैं।
दिसंबर में क्रिसमस के समय यहां विदेशी पर्यटकों की भरमार रहती है। यहां के चर्च में प्रार्थना के लिए देश विदेश के लोग पहुंचते हैं। इसके साथ ही गोआ का समुद्री किनारा पर्यटकों को खूब लुभाता है।गोआ में कई खूबसूरत समुद्र तट हैं जिनमें प्रमुख है मीरमार, दोनापौला, कोलंगुट, वेगाटेर, कोलाबा, अंजुना इदत्यादि।
इसके साथ ही यहां के सांस्कृति स्थलों में अगुडा किला, संग्रहालय आदि भी देखने लायक है। गोआ में नेशनल पार्क भी है। बोंडला अभ्यारण्य, कावल वन्य प्राणी अभ्यारय, कोटिजाओ वन्यप्राणी अभ्यारण्य आदि प्रमुख है। यहां के चर्च में भी देश विदेश के लोग प्रार्थना के लिए जुटते हैं।
गोआ के लिए दिल्ली, मुंबई, कोचीन और तिरुअंतपुरम से सीधी विमान सेवा उपलब्ध है। इसके साथ ही यह रलमार्ग से भी जुड़ा है। कोंकण रल मार्ग गोवा होते हुए गुजरती है। यह भारत की महत्वपूर्ण रलमार्ग है। सड़क के जरिए भी गोआ आसानी से पहुंचा जा सकता है। मुंबई से गोआ के लिए प्रतिदिन बसें खुलती है। ठहरने के लिए गोआ में निजी और सरकारी क्षेत्र के कई होटल हैं।