बरसात के बिना गीत-संगीत अधूरा है। मुझे तो हर गीत में बरसात की रिमझिम सुनाई देती है। %परिणीता% के मेर गीत %पीहू बोले पिया बोले..% के एक अंतरा %प्यास की जलपरी प्रीत लुटाती, झमझम बरसी फिर मेरी तरह..% में आप बरसात की प्रतीकात्मकता देख सकते हैं। जहां तक मेरी बात है, तो बरसात मेरे लिए आनंदित होने का मौसम है।
मैं तो कहता हूं कि बरसात का सारा मौसम छुट्टियों का मौसम घोषित होना चाहिए। मैं अक्सर देखता हूं, बरसात की झड़ी पड़ते ही लोग हकबका कर घरों में या किसी ओट में घुसने की जल्दबाजी में दिखते हैं, जबकि मैं पूरे मन से बारिश की फुहारों को एंज्वॉय करता हूं।
इसी कारण मैं 26 जुलाई 2005 को मुंबई की अंधाधुंध बारिश और उससे उपजे सैलाब में फंसता चला गया था। चूंकि सड़कों पर पानी का़फी भर गया था और उस पर किसी गटर में समाने का ़खौ़फ पैदा हो गया था, तो मैंने बांद्रा (पश्चिम) के एक होटल में रूम ले लिया था। तब होटलों में रूम मिलने मुश्किल हो गए थे और मेर साथ एक और फैमिली ठहरी थी।
मेरे पास हमेशा एक छोटा टेपरिकॉर्डर- ट्रांजिस्टर होता है, जिस पर मैं गीत सुनता और रिकॉर्ड करता रहता हूं। मैं उस रात होटल में उन लोगों के साथ ट्रांजिस्टर पर गीत और मौसम की जानकारी सुनता रहा था। इस दौरान सब लोग बरसात से जुड़े अपने-अपने रोचक प्रसंग सुनाते रहे थे, तो का़फी एंज्वॉयफुल नाइट हो गई थी। उन दिनों मैं %एकलव्य% की स्क्रिप्ट और गीत लेखन में व्यस्त था, तो वह बरसात मेरे जीवन की एक बड़ी यादगार है।
मेरे हिसाब से मुंबई में बरसात का ही इ़कलौता मौसम है, जो साल भर के मौसम में एक बदलाव लाता है, वरना यहां बरसात के अलावा आठ-साढ़े आठ महीने एक जैसा ही मौसम और माहौल होता है।
बरसात के दौरान मुंबई के पास के हिल स्टेशन ़खूब हरे-भरे और एकदम साफ-सुथरे हो जाते हैं, तो उधर जाना मेरा प्रिय श़गल बन गया है। वहां उफनते बरसाती नाले और पहाड़ियों से गिरते स़फेद झरनों के पानी को छेड़ने में मुझे बहुत मÊा आता है। पिछले दिनों मैंने सुधीर मिश्रा की फिल्म %खोया खोया चांद% की रिकॉर्डिग की है। यश चोपड़ा की %लागा चुनरी में दा़ग% के गीत लिखे हैं। अभी थोड़ी ़फुर्सत है, तो खंडाला जा रहा हूं दोस्तों के साथ। इस बीच बरसात की मौज-मस्ती के साथ थोड़ा-बहुत सोचना- लिखना हो जाता है।