मुंबई :दुनिया में वनस्पति तेलों के दूसरे बड़े खरीदार भारत में सीमा शुल्क में कटौती के बाद पाम आयल का मासिक आयात 80 फीसदी बढ़ने की संभावना है।
क्यों बढ़ेगा आयात: गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री का कहना है कि भारत करीब साढ़े चार लाख टन पाम आयल का आयात जुलाई से अक्टूबर के बीच करेगा। साल्वेंट एक्सट्रेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट के अनुसार जून तक के आठ माह में औसत मासिक आयात 2,45,000 टन रहा है। 1976 से वनस्पति तेलों के व्यवसाय में लगे मिस्त्री की राय में सीमा शुल्क में कमी से पाम आयल का आयात बढ़ जाएगा। मुंबई की गोदरेज इंडस्ट्रीज की यूनिट गोदरेज इंटरनेशनल भारत में वनस्पति तेलों की बड़ी खरीदार है।
कीमतों पर असर:भारत आने वाले ज्यादा लदान से मलेशिया में पाम आयल और शिकागो में सोयाबीन तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। पाम आयल की कीमतें 6 जून को रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचीं। 2006 तक पांच साल में क्रूड आयल कीमतें पांच गुनी हो गई हैं।
मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम आयल के अक्टूबर डिलीवरी इंडेक्स 0.8 फीसदी बढ़ गया है। शिकागो में जहां सोयाबीन तेल 40 फीसदी बढ़ा है, वहीं पाम आयल की कीमतें 62 फीसदी बढ़ी हैं। भारत खाद्य तेल या साबुन में इस्तेमाल करने के लिए मलेशिया व इंडोनेशिया से पाम आयल आयात करता है।
खपत घटी:भारत अपनी जरूरत के खाद्य तेल का आधा आयात करता है। क्रूड पाम आयल पर सीमा शुल्क घटाकर 40 फीसदी कर दिया गया है। इससे आयात बढ़ने की संभावना है। अक्टूबर को खत्म होने वाले साल में वनस्पति तेल का आयात 60 लाख टन होगा।
मिस्त्री का कहना है कि भारत में खाद्य तेल की ऊंची कीमतों के कारण खपत कम पड़ी है। भारत ने जून में 5.9 लाख टन खाद्य और अखाद्य तेल खरीदा है। आठ माह में आयात 6.3 फीसदी बढ़ा है।
तेल की धार-आयात शुल्क में कमी के कारण क्रूड पाम आयल का आयात बढ़ जाएगा। -भारत खाद्य तेलों का लदान बढ़ने से मलेशिया में पाम आयल व शिकागो में सोयाबीन तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी। -भारत में वनस्पति तेलों का आयात अक्टूबर तक औसतन 6.5 लाख टन मासिक था।