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पावर प्लांट ठेका चीनी कंपनी को

रायपुर: power plant छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड के कोरबा वेस्ट का प्लांट चीनी कंपनी बनाएगी। इसकी क्षमता 600 मेगावाट होगी। पावर प्लांट के ठेके की दौड़ में भेल भी शामिल था। बोर्ड के चेयरमैन राजीब रंजन का कहना है कि भेल से चीनी कंपनी की दर 480 करोड़ रुपए कम है। इस वजह से इस कंपनी को प्राथमिकता दी गई। ठेका दे दिया गया है, लेकिन कंपनी ने इस पर स्वीकृति नहीं दी है। वह कुछ शर्ते पर संशोधन चाहती है। निगोशिएसन के लिए उनके अधिकारी आएंगे।

सीएसईबी के मंडल उत्पादन सदस्य एसपी चतुर्वेदी ने बताया कि चीनी कंपनी को 3.2 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट की दर से भुगतान किया जाएगा। कंपनी 300-300 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां लगाएगी। इनसे कुल 65 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होगा। खबर है कि जून में ठेका फाइनल कर लिया गया था। इसके लिए 12 जुलाई को लैटर आफ इंडेंट (एलओआई) जारी किया गया, लेकिन विरोध को देखते हुए इसे सार्वजनिक नहीं किया गया।

गौरतलब है, चीनी कंपनी को ठेका देने का प्रदेशव्यापी विरोध हो रहा था। विद्युत मंडल के इंजीनियरों से लेकर कर्मचारियों तक ने मुख्यसचिव और ऊर्जा सचिव को ज्ञापन सौंपे थे। उनका कहना था कि चीनी कंपनी संयंत्र तो लगा देगी, लेकिन बिजली उत्पादन दर अधिक होगी। प्लांट शुरू होने के बाद इसमें खराबी आई तो स्पेयर पाट्र्स की समस्या आएगी।

बताते हैं कि ठेके की दौड़ में शामिल भेल ने 500 मेगावाट के लिए 250-250 मेगावाट की दो इकाइयां लगाने का आफर दिया था। भेल के प्लांट से कुल 90 फीसदी यानी 450 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन होता। प्रति मेगावाट चीनी कंपनी ने कम रेट भरा इसलिए उसे ठेका दे दिया गया। बताया गया कि भेल का एल-वन उजागर नहीं किया गया। मंडल का अमला भेल के पक्ष में इसलिए था कि वह देशी कंपनी है और देश में ज्यादातर प्लांट उसी के लगाए हुए हैं। सरकारी कंपनी होने की वजह से उसकी गुडविल भी ज्यादा है।

उत्पादन कब कोरबा-पश्चिम के लिए चीनी कंपनी को अपना सहमति-पत्र एक महीने के भीतर सीएसईबी को सौंपना है। तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार, कोरबा-पश्चिम विस्तार की पहली इकाई से मार्च 2010 (33 महीने) तक व दूसरी इकाई से जून 2010 (36 महीने) तक व्यावसायिक तौर पर विद्युत उत्पादन होना है।