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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर: रायगढ़ के रनिंग रूम का ठेकेदार भाग गया और बिलासपुर में रेलवे कर्मियों के व्यवस्था संभालने के बाद भी शिकायत जारी है। रेलवे ने अपने रनिंग स्टाफ के लिए सभी जगह रनिंग रूम की व्यवस्था रखता है। इन जगहों पर ड्राइवर व गार्ड के आराम व भोजन की व्यवस्था रहती है और घंटो डयूटी कर लौटने वाले इन रेल कर्मियों यह व्यवस्था अति आवश्यक भी है। पिछले दो साल से बिलासपुर के रनिंग रूम को पिछले दो साल से ठेके पर चलाया जा रहा था।
इस दैरान बहुत शिकायतें मिलने लगी थी। अधिकारियों से यह भी शिकायत की गई थी कि रनिंग रूम में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने लगा है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए जून माह से रनिंग रूम का ठेका समाप्त कर दिया गया और यहां काम रेल कर्मियों ने संभाल लिया है, लेकिन इसके बाद भी यहां की व्यवस्था सुधरती नजर नहीं आ रही है।
रनिंग रूम में स्टाफ को भोजन समय पर नहीं मिलने की शिकायत लगातार मिल रही है। ट्रेन ड्राइवरों के अनुसार स्थिति यह है कि कई दफा तो समय पर भोजन की व्यवस्था न हो पाने यात्री ट्रेनें तक लेट हुई हैं। इसके बाद भी इस ओर किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। इसी से मिलता-जुलता हाल रायगढ़ रनिंग रूम का है। इसे भी 1 जुलाई से ठेके पर दिया गया था। ठेकेदार ने यह काम किसी पेटी कांट्रेक्टर को दे दे दिया और पेटी कांट्रेक्टर 20 जुलाई को काम छोड़ कर भाग गया।
21 जुलाई से फिर से रेलवे ने इसे अपने कब्जे पर ले लिया। रेल कर्मियों ने फिर इस काम को फिर संभाला है और इसके बाद भी यहां शिकायतें मिल ही रही है। इन रनिंग रूमों पर रनिंग स्टाफ का कितना दबाव होता है, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इन दो रनिंग स्टाफ में 80 कर्मचारी लगते हैं। बिलासपुर से ही रोज यात्री ट्रेनों और मालगाड़ी को मिलाकर 160 से ज्यादा ट्रेनें पार होती हैं और रायगढ़ में भी यह आंकड़ा 60 के पार है।
इस स्थिति में इन रनिंग रूम पर ड्राइवर व गार्ड का कितना भार होगा। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं ठेके में दिए जाने के बाद वापस रेलवे को यह काम चालू करने की स्थिति में अपने कर्मचारी बुलाने पर स्थानांतरण भत्ते का अतिरिक्त व्यय वहन करना पड़ रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी रनिंग रूम की स्थिति नहीं सुधर पा रही है और रनिंग स्टाफ में इसको लेकर नाराजगी बढ़ती ही जा रही है और व्यवस्था सुधारने की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
कब मिलेगा दो रूपए में भोजन रेल बोर्ड ने रनिंग स्टाफ के लिए तकरीबन तीन माह पहले यह आदेश जारी किया था कि रनिंग रूम में इन कर्मियों को दो रूपए में पूरा भोजन उपलब्ध कराया जाए। बाकी 18 रूपए रेलवे वहन करेगा। तीन माह गुजरने के बाद इस योजना को चालू करने की कोई सुगबुगाहट तक नहीं है। रनिंग रूम जब ठीक से नहीं चलाया जा पा रहा है तो दो रूपए में भोजन का मामला तो बड़ा कठिन नजर आ रहा है।