उदयपुरमोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बीएल चौधरी ने कहा कि शिक्षक को दंडित करके परिणाम अच्छा रखने की सोच उचित नहीं है। शिक्षकों को श्रेष्ठ संसाधन उपलब्ध कराना चाहिए। प्रो.चौधरी सोमवार को यहां श्री जवाहर जैन शिक्षण संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर 11 में प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक वाक्पीठ, माध्यमिक प्रथम की सत्रारंभ संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा में विषमताओं के लिए जिम्मेदार कौन है, इस विषय पर गहन चिंतन की आवश्यकता है। समाज, अभिभावक, शिक्षक का समन्वय जरूरी है, न्यूनतम परिणाम के लिए समग्र विश्लेषण की आवश्यकता नहीं, विद्यालय आधारित विश्लेषण होना चाहिए।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद बीआर भाटी ने कहा कि शिक्षक की क्षमताओं का आकलन उचित नहीं है। बालकों को स्वयं उन्नति प्राप्त करने का रास्ता दें। उसे सोच दें कि वह क्या बनना चाहता है और उसी के अनुरूप उसे संसाधन उपलब्ध कराएं।
विशिष्ट अतिथि हिम्मतसिंह नाहर ने कहा कि शिक्षक से राष्ट्र को बहुत अपेक्षाएं हैं जिन पर उन्हें खरा उतरना होगा। इस अवसर पर डा. हेमेन्द्र चंडालिया ने संस्था प्रधानों का आह्वान किया कि वे ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करें जो बौद्धिक रूप से समृद्ध हो व सामाजिक समरसता का सम्मान करें। डा.परमेन्द्र दशोरा ने कहा कि शिक्षा प्रशासन को स्वतंत्र रूप से विकसित करने की जरूरत है, शिक्षा को दुधारू गाय की तरह दुहने से शिक्षा में विषमताएं पैदा होंगी।
इससे पूर्व वाक्पीठ अध्यक्ष भरत मेहता ने वाक्पीठ का परिचय दिया। शक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी परमेश्वर श्रीमाली ने विचार रखे। संस्था प्रधान अरुणा गुप्ता ने संस्था परिचय दिया। वाकपीठ उपाध्यक्ष वीरेन्द्र पंचोली ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया। संयोजन व धन्यवाद वाक्पीठ सचिव कमलेन्द्र सिंह राणावत ने दिया।