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हे त्रिपुरारि सुनो पुकार हमारी..

बीकानेर बीकानेर में 'सावण सुरंगा' माना जाता है मगर बारिश न हो तो यहां के लोग तड़प उठते हैं और यह तड़प देवाधिदेव महादेव के सम्मुख पुकार बनकर निकलती है। सावन के पहले सोमवार को भी शिवालयों में कुछ ऐसी ही अरदास होती रही। शिवलिंग पर जलधारा बहाने वाले लोग 'हे त्रिपुरारि पुकार हमारी, सुनो बहा दो जलधारा..' पुकार करते नजर आए।

देवालयों में सोमवार अलसुबह से ही भक्तों का तांता लगने लगा। खासतौर पर लालेश्वर महादेव मंदिर शिवबाड़ी, देवीकुंड सागर, मरकडेश्वर, गोपेश्वर, काशी विश्वनाथ, हषरेलाव आदि मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ से मेले-सा माहौल हो गया। रघुनाथसागर बगीची के जबरेश्वर, रामेश्वर, धरणीधर आदि मंदिरों में भी सावन के पहले सोमवार पर सामूहिक पूजा के आयोजन हुए।

श्रद्धालुओं की इस भीड़ में जहां महिलाओं की अच्छी-खासी भागीदारी रही वहीं भीड़ छंटने के बाद दोपहर में अधिकांश शिवालयों में रुद्राभिषेक का क्रम चल पड़ा। जल, दूध, दही, घी, शहद आदि से बने पंचामृत से कहीं शिव का अभिषेक हुआ तो कहीं मंत्रोच्चार के साथ शुद्ध घी की धार शिवलिंग पर बहाई गई। गन्ने सहित दूसरे फलों के रस से शिव का अभिषेक करने के साथ ही आक, धतूरा, भांग आदि का भोग भी भगवान शिव को लगाया गया।

दिनभर पूजन-अभिषेक के बाद शाम को हुई संध्या आरती में 'हो शिव भूरी जटा वात्त, हो शिव ओढण मृग छात्त..' जैसी स्तुतियों से शिवालय गूंज उठे। 'काल हर, कष्ट हर, दुख हर, दारिद्र हर..' प्रार्थना के साथ 'विश्व का कल्याण हो' उद्घोष लगाते हुए भक्तों ने मरुधरा में जलधारा बहाने की अरदास भी की। कई शिवालयों में रात्रि जागरण भी हुआ। दूसरी ओर शहर एवं आस-पास के मठ, बगीचियों में गुरुपूजन का क्रम दूसरे दिन भी चलता रहा। गुरुपूर्णिमा के मौके पर लोगों ने अपने गुरु को नारियल, फल एवं भेंट चढ़ाकर आशीर्वाद लिया।

कन्याओं ने व्रत रखासावन के सोमवार व्रत और महादेव की पूजा से अभीष्ट प्राप्ति के लिए महिलाओं, खासतौर पर कुंआरी कन्याओं ने सोमवार का व्रत रखा और शिवलिंग पर दूध की धारा बहाते हुए मनोकामनाएं रखी। महिलाओं और कन्याओं के अलावा भी सैकड़ों लोगों ने सोमवार से व्रत शुरू किए। कई लोगों ने चातुर्मास में पत्तों पर भोजन करने का व्रत शुरू किया तो कई लोगों ने महीनेभर के व्रत की शुरुआत इस दिन से की। घरों में भगवान शिव की विशेष पूजा व कीर्तन का आयोजन भी हुआ।