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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़: कनाडा के ओंटारियो स्थित करीब आधा दर्जन सिख संस्थाओं को सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी से मिली ग्रांट पर कनाडा के ऑडिटर जनरल के ऐतराज के बाद राज्य के सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन मंत्री माइक कोले को इस्तीफा देना पड़ा। गौरतलब है कि ओंटारियो में पंजाबी प्रवासियों की अच्छी खासी आबादी है और उनमें अधिकांश लिबरल पार्टी के समर्थक हैं। सरकारी ग्रांट पाने वाली संस्थाओं के पदाधिकारी लिबरल पार्टी से जुड़े हुए थे।
32 मिलियन डॉलर ग्रांट बांटी: मंत्री पर कुल 32 मिलियन डॉलर की ग्रांट ऐसी संस्थाओं में बांटने का आरोप लगा है, जिनका कोई खास सामाजिक आधार नहीं था। कई मामलों में तो मौखिक अनुरोध पर ही ग्रांट दे दी गई। ओंटारियो किक्रेट एसोसिएशन को ही डेढ़ लाख डॉलर का चैक दे दिया गया। वे खुद ही इस एसोसिएशन के प्रेसीडेंट हैं। एसोसिएशन में अधिकांश सदस्य इंडो-कनाडियन मूल के ही हैं। कई टैक्स पेयर्स एसोसिएशंस ने भी मामले पर ऐतराज जताया था।
सिख संस्थाओं को 4 करोड़ रुपए : इमीग्रेशन मंत्री माइक कोले ने सिख संस्थाओं को करीब 1 मिलियन डॉलर की मदद की जो कि भारतीय करेंसी में करीब 4 करोड़ रुपए बनती है। इन संस्थाओं में से ओंटारियो खालसा दरबार को सबसे अधिक 2.5 लाख डॉलर मिले। एजी की रिपोर्ट में कई संस्थाओं के नाम हैं, लेकिन अभी कुछ नाम ही सामने आए हैं।
>> कुछ चुनिंदा सिख संस्थाओं को सरकारी ग्रांट मिलने से व्यापक आधार वाली संस्थाओं में नाराजगी थी। भविष्य में संस्थाओं का मूल्यांकन कर सामाजिक आधार पर सरकारी ग्रांट जारी करने की नीति बनाई जाने की बात शुरू हो गई है।
— बलबीर सिंह, टोरंटो निवासी राजनीतिक मामलों के जानकार