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ताजमहल में क्यों नाचे? : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली.दुनिया का अजूबा बन चुके ताजमहल के परिसर में हुए एक नृत्य आयोजन से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि नौ साल पहले लगी रोक के बावजूद यह आयोजन क्यों और किसकी अनुमति से हुआ। इसके लिए कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है।जस्टिस एसबी सिन्हा, एसएच कपाड़िया और डीके जैन की बेंच ने 400 साल पुराने स्मारक के रखवालों को यह नोटिस एक राष्ट्रीय दैनिक में 31 जनवरी 2007 को प्रकाशित समाचार व तस्वीर के आधार पर जारी किया है।

यह मुद्दा कोर्ट की नजर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लाया गया था। इसके वकील अजय पंजवानी का कहना है कि यह आयोजन कोर्ट के आदेश और प्राचीन स्मारक कानून का उल्लंघन है जो सभी प्राचीन इमारतों में किसी भी प्रकार के आयोजन पर प्रतिबंध लगाते हैं।

केंद्र व एएसआई से कहा गया है कि वे अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के इस आयोजन का विस्तृत विवरण कोर्ट को दें। यदि आयोजन की अनुमति दी गई थी तो उस अनुमति संबंधी विवरण भी पेश करें।

आपत्ति क्यों? : मार्च 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल परिसर में सभी तरह के आयोजनों पर रोक लगा दी थी। उसने कहा था कि किसी भी तरह का शो या आयोजन ताजमहल की चहारदीवारी से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर हो।

किसका था आयोजन : इस साल 30 जनवरी (शहीद दिवस) को अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने ताजमहल परिसर में यह समारोह आयोजित किया था। कंपनी अपने कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ विस्टा का नया संस्करण जारी करने का जश्न मना रही थी।

सड़क चौड़ी करने पर भी सवाल : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व एएसआई से ताजमहल तक जाने वाली सड़क चौड़ी करने की योजना का ब्योरा भी मांगा है जिसके तहत करीब 3,500 पेड़ गिराए जाने हैं।