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विकास को लेकर हम राजनीति नहीं करते: प्रिया दत्त

priyaभारत पूरी दुनिया के सामने एक प्रमुख आर्थिक ताकत के रूप में सामने आया है। वह नई तकनीकी और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बल पर विव्श्र का अग्रणी देश बन सकता है। विकास के लाभ को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए शिक्षा के व्यापक प्रसार की आवश्यकता है। इसमें एनजीओ और कापरेरट सेक्टर आग आएं। यह उनकी देश और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि इन बेहद प्रतिकूल हालात में भी उन्होंने भास्कर संवाददाता गुरुदत्त तिवारी के सवालों का जवाब देने के लिए समय निकाला।

आजादी के 60 सालों बाद अब पूरी दुनिया भारत को किस निगाह से देखती है?

दुनिया भारत को एक तेजी से बढ़ती महाशक्ति मानती है। इस देश की सबसे बड़ी पूंजी इसका पढ़ा-लिखा प्रतिभा संपन्न नौजवान है। भारत ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में कई अविस्मिरणीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। अब यह देश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नई तकनीकी से बेहतरीन सामंजस्य बिठाकर तेजी से विव्श्र का अग्रणी देश बनने की ओर अग्रसर है।

एक नौजवान सांसद होने के नाते आप आने वाले सालों में भारत को क्या हासिल करते देखना चाहंगी? आप और देश के नागरिक उसमें क्या योगदान दे सकते हैं?

मैं इस देश को वैव्श्रिक ताकत बनाना चाहूंगी, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि हम अपनी गांव के लोगों और गरीब आदमी की उपेक्षा नहीं कर सकते। वही तरक्की न्यायोचित मानी जा सकती है, जिसमें समाज के सभी तबकों की हिस्सेदारी हो। देश के हर हिस्से में तरक्की का लाभ पहुंचाने के लिए वहां शिक्षा का उचित प्रसार करना बेहद आवश्यक है। केंद्र सरकार का सर्वशिक्षा अभियान उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। एनजीओ और कॉपरेरट सेक्टर को शिक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।

क्या आप जैसे सभी नौजवान सांसद दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर देश के बेहतर भविष्य पर चर्चा करने के लिए मिलते हैं?

हां, हम सभी नौजवान सांसद वरिष्ठ सांसदों से देश के बेहतर भविष्य के लिए चर्चा करते हैं। देश के विकास को लेकर हम सभी का एक ही दृष्टिकोण है। इस मसले पर कोई राजनीति नहीं होती।

आपके विचारों से देश के इतिहास का सबसे निर्णायक बिंदु कौन सा है?

ऐसे बिंदु बहुत से हैं। इसमें किसी एक का नाम नहीं गिनाया जा सकता, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि आज भारत एक सुपर पावर बनकर उभरा है।

पिछली 60 सालों में एक देश के रूप में भारत की सबसे बड़ी असफलता क्या है?

मैं बेहद सकारात्मक नजरिया रखने वाली हूं। मेरा मानना है कि देश के लिए सफलता के साथ असफलता भी जरूरी है क्योंकि जब हम असफल होते हैं, तो हम उन गलतियों पर विचार करते हैं, जिनकी वजह से हम नाकाम रहे। आज सबसे अहम बात यह है कि हम एक आम आदमी के जीवन में बदलाव लाने में सफल हो रहे है।

आप समाज सेवा में काफी समय से सक्रिय हैं। क्या आप मानती हैं कि तब से लेकर आज के हालात में क्या बदलाव आया है और आप क्या बदलाव लाना चाहती हैं?आज मैं इस स्थिति में हूं जब मैं लोगों की सीधे मदद कर सकती हूं। महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और अपंगों का कल्याण ये विषय आज भी मेरे दिल के बेहद करीब हैं।

आप आने वाले 25 और 50 सालों में भारत को क्या बनते देखना चाहती हैं?

मैं चाहूंगी कि इन आने वाले सालों में आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार हो। गरीबी खत्म हो। सबको बेहतर शिक्षा और उसके बाद रोजगार मिले। देश के हर हिस्से में लोगों को चिकित्सा सुविधा न्यूनतम शुल्क पर मिले। हमें इन्हीं छोटी छोटी बातों से शुरुआत करनी होगी। बाद में यही एक व्यापक परिवर्तन के रूप में सामने आएंगी।

प्रिया दत्तअपने भाई संजय दत्त को सजा होने के बाद संकटों में जूझ रहीं कांग्रेस सांसद प्रिया दत्त का जन्म 28 अगस्त 1966 को हुआ था। मुंबई विव्श्रविद्यालय के सोफिया कालेज से बीए, समाज शास्त्र और न्यूयार्क के सेंटर फॉर मीडिया आर्ट से टीवी प्रोडक्शन में पीजी तक पढ़ाई की है। समाज सेवा से अपना कैरियर प्रारंभ करने वाली प्रिया को अपने पिता और जाने माने अभिनेता और केंद्रीय मंत्री सुनील दत्त का आकस्मिक देहांत हो जाने के कारण राजनीति में आना पड़ा। उन्होंने नवंबर 2005 में पिता की उत्तर पश्चिम मुंबई लोकसभा क्षेत्र से पहली जीत दर्ज की ।

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