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एंग्री यंग मैन के तेवर

और अंतत: पर्दे के एंग्री यंग मैन यानी कि अमिताभ बच्चन पर्दे के बाहर भी अपने रंग में आ ही गए। उन्होंने एक टीवी चैनल के सामने अपनी पूरी भड़ास निकाल ही दी कि यदि लगता है कि जमीन के मामले में उन्होंने कुछ गलत किया है तो उन्हें जेल में डाल दिया जाए। वे न तो कोई सियासी आदमी हैं, न उन्हें मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनना है और न ही कोई चुनाव लड़ना है। जमीन रखना कोई गुनाह नहीं है और यदि सत्ता के साथ इसी तरह फैसले और प्रशासन के नजरिए बदलते रहेंगे, तो हर दस्तावेज नई सरकार के साथ ही झूठा हो जाएगा।

बाराबंकी की जमीन और पुणो के फार्महाउस प्रकरण के बाद अमिताभ बच्चन पहली बार इतना खुलकर बोले हैं। उनके संवादों पर गौर किया जाए तो निश्चित ही वे राजनीति और मीडिया से खासे खफा हैं। लेकिन उनकी सफाई में भी सियासत ही झलकती है। उनका पूरा रोष उत्तरप्रदेश की नई सरकार पर ही है। यह तो किसी को बताने की जरूरत नहीं कि यदि उनकी मुलायम सिंह-अमर सिंह से प्रगाढ़ता न होती और जया बच्चन समाजवादी पार्टी की झंडाबरदार न होतीं तो बाराबंकी की जमीन उनके नाम लिखी ही क्यों जाती?

एक बार प्रतापगढ़ के बाबू की पट्टी, जो कि उनका पुश्तैनी गांव है, की जमीन होती तो कुछ आधार भी बनता, लेकिन यह तो सीधे-सीधे किसान बनने का प्रमाणपत्र हासिल करने का मामला था ताकि पुणो में महाराष्ट्र के कानून के मुताबिक जमीन खरीदी जा सके। अब ढाई साल पहले उत्तरप्रदेश की मुलायम सरकार आंख मूंदे हुए थी और मायावती सरकार की आंखें इस मामले को लेकर खुल र्गइ तो इसमें गलत क्या है। कानून अपना काम कर रहा है तो अमिताभ बच्चन को देश की न्यायपालिका पर भरोसा रखना चाहिए। यदि वे गलत नहीं हैं तो उन्हें किसी बात का डर नहीं होना चाहिए। बच्चन की ऐसी खीझ उनकी महामानवी छवि के अनुरूप नहीं कही जा सकती।