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'कंकाल' नहीं पढ़ाने का फरमान जारी

अजमेर: book राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने गुर्जरों पर टिप्पणी के कारण विवाद में आए उपन्यास 'कंकाल' को इस साल नहीं पढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। पुस्तक से संबंधित सवालों के दस नंबर अन्यत्र समाहित करने के आदेश अलग से जारी किए जाएंगे। इस बीच, सोमवार को बोर्ड ने पाठ्यक्रम समिति को कंकाल के स्थान पर नई किताब जारी करने संबंधी प्रस्ताव नहीं भेजा है।

कार्यवाहक सचिव एल. डी. यादव द्वारा जारी आदेश के मुताबिक राज्य सरकार ने 10 अगस्त को पुस्तक हटाने के निर्देश बोर्ड को दिए थे। कंकाल विख्यात साहित्यकार जयशंकर प्रसाद का उपन्यास है, जो ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अनिवार्य हिंदी के रूप में पढ़ाया जा रहा था। बोर्ड सचिव ने आदेश की प्रति शिक्षा मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, शिक्षा राज्यमंत्री देवनानी, स्कूल शिक्षा के प्रमुख शासन सचिव सुधीर भार्गव, शिक्षा सचिव वीनू गुप्ता, आयुक्त माध्यमिक शिक्षा जे. पी. चंदेलिया को भेजी गई है। इनके अलावा शासन उपसचिव, शिक्षा महकमे के सभी उप निदेशकों, जिला शिक्षा अधिकारियों और प्रदेश के सीनियर सेकंडरी स्कूलों के सभी प्रधानाचार्ये को भी भेजी है।