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जयपुर:
सिंजारे की पूर्व संध्या पर सोमवार को शहर के प्रमुख बाजारों में ग्राहकों की जबरदस्त भीड़ रही। लोगों ने लहरिया और सिंजारे की प्रमुख मिठाई घेवर की जमकर खरीदारी की। मिठाई की प्रमुख दुकानों पर तो भीड़ के कारण ग्राहकों को घेवर खरीदने के लिए आधा घंटे तक इंतजार करना पड़ा। गिफ्ट आइटमों, फलों और सुहाग सामग्री बेचने वालों की दुकानों पर भी अच्छी ग्राहकी हुई। सिंजारा और तीज के इस सीजन में व्यापारियों ने घेवर, मिठाई, लहरिया व ज्वैलरी का 15 से 18 करोड़ रुपए का कारोबार होने का अनुमान व्यक्त किया है।
शहर में देर रात तक साड़ियों और घेवरों की बिक्री हुई। जौहरी बाजार, लालजी सांड का रास्ता, खजाने वालों का रास्ता, दड़ा मार्केट, विभिन्न मॉल्स में साड़ियों के शोरूमों पर महिलाओं ने सिंजारे के लिए साड़ियां और लहरिया की खरीदारी की। इसके साथ गली-गली में व प्रमुख मिष्ठान भंडारों पर भी घेवरों और मिठाई खरीदने वालों की भीड़ रही। एलएमबी होटल के मालिक अजय अग्रवाल का कहना है कि घेवरों के साथ सिंजारे पर अन्य मिठाइयों की मांग भी रहती है। आजकल लोग पनीर से बने घेवरों की मांग अधिक करते हैं। इसके अलावा मलाई, मावे, रबड़ी, दूध और सादा घेवर भी खूब बिकते हैं। उन्होंने इस सीजन में 3 से 4 करोड़ के घेवरों और मिठाई के कारोबार का अनुमान व्यक्त किया।
सबसे ज्यादा मांग लहरिया की: जयपुर होलसेल टैक्सटाइल डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव राजेश शर्मा ने बताया कि तीज पर बिक्री लगभग एक सप्ताह तक रहती है। इस दौरान बाजार में लहरिया व साड़ियों का लगभग 9 से 10 करोड़ का कारोबार हो जाता है। सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष रामेश्वर लाल गोयल ने बताया कि सावे बंद होने से ज्वैलरी की बिक्री कम हो गई है। जो कुछ हो रही है, वह केवल तीज-सिंजारे के कारण हो रही है। सिंजारे में आजकल सोने-चांदी का एक आइटम भेजने का चलन बढ़ गया है। इस सीजन में ज्वैलरी के 2 से 3 करोड़ का कारोबार होने का अनुमान है।
चलन फैंसी लहरिया का: पहले परंपरागत लहरिया की मांग ज्यादा थी, जो रानी कलर का होता था। वर्तमान में महिलाएं ऐसा लहरिया खरीदना चाहती हैं, जो अन्य अवसरों पर भी पहना जा सके। इसी कारण आज कई रंगों में ये उपलब्ध हैं। इसमें भी फैंसी लहरिए का चलन बढ़ गया है। इस पर जरदोजी, ट्यूबलाइट, कॉपर और मोती का जयपुर वर्क होता है। यह सादा लहरिए के मुकाबले महंगा रहता है।
इस प्रकार हुआ कारोबार लहरिया व साड़ियां 9 से 10 करोड़ घेवर और मिठाई 3 से 4 करोड़ ज्वैलरी 2 से 3 करोड़ गिफ्ट आइटम, फल, ड्राई फ्रूट, सुहाग सामग्री व अन्य आइटम 1 करोड़