bhaskar Web English
HomeNewsMetrosBhopal Bhopal

गोल्डन सिल्क में नाम कमाएगा प्रदेश

होशंगाबाद: silk विश्व के सबसे महंगे मूंगा रेशम यानी 'गोल्डन सिल्क' उत्पादन को लेकर मप्र अब पहली बार देश में नाम कमाएगा। जिले के पचमढ़ी के जंगल में मैदा लकड़ी पेड़ पर मूंगा रेशम कृमि का पालन कर गोल्डन सिल्क बनाने में यह सफलता प्रदेश को होशंगाबाद जिले में प्राप्त हुई है। मूंगा रेशम से अब जिले व प्रदेश के हजारों वनवासियों को आजीविका का नया साधन मिलेगा।

प्रदेश में वैसे तो तीन प्रकार के शहतूती, कोसा तथा ईरी (अरंडी) रेशम का उत्पादन किया जाता है। इन तीनों में होशंगाबाद जिला राज्य में प्रथम वरीयता पर है। शहतूती रेशम शहतूत पौधे पर, कोसा साज व अजरुन पर तथा इरी रेशम अरंडी की पत्ती पर कीड़ा पालन कर तैयार होता आया है, लेकिन अब मैदा की लकड़ी पर मूंगा रेशम कृमि का पालन कर मूंगा रेशम यानी गोल्डन सिल्क का भी उत्पादन होशंगाबाद जिले के माध्यम से प्रदेश में होने जा रहा है।

जिले में पिछले दो वर्षो की मेहनत के बाद मूंगा रेशम तैयार करने में सफलता मिली है। अभी तक यह रेशम मूलत: उत्तरपूर्वी राज्यों जैसे असम, मणिपुर, त्रिपुरा, इंफाल इत्यादि में पैदा होता आया है। इन राज्यों में सोम व सालू पेड़ों की पत्ती खाकर मूंगा कीड़े पलते हैं।

जिला रेशम अधिकारी आरके श्रीवास्तव द्वारा राज्य वन अनुसंधान जबलपुर की मदद से मप्र में खासकर पचमढ़ी व सोहागपुर वन क्षेत्र में मैदा के पेड़ यानी लिटसिया ग्लूटीनोसा पर मूंगा रेशम कृमि पालन का नवीन प्रयोग किया गया। इसमें दो वर्ष की मेहनत के बाद सफलता मिली है। इस पेड़ की छाल सुगंधित होती है तथा अगरबत्ती बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। पचमढ़ी, मटकुली, सिंगानामा तथा सोहागपुर वनक्षेत्रों के आसपास के वनों में मैदा के पेड़ पाए गए हैं।

जिला रेशम अधिकारी आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि मूंगा कीड़े के अंडे असम से मंगवाए गए तथा इन्हें पचमढ़ी में प्रायोगिक रूप से मैदा पेड़ के ऊपर पाला गया। करीब तीस दिनों में मप्र का पहला मूंगा ककून 12 जुलाई 07 को बनकर तैयार हुआ। इसके साथ ही वर्तमान जलवायु इसके लिए उपयुक्त पाई गई है। मैदा पेड़ पर मूंगा रेशम यानी गोल्डन सिल्क का पालन किया जा सकता है। मूंगा कीड़े से मिलने वाला ककून तेज सुनहरे रंग का मिला है। इसलिए इसे गोल्डन सिल्क नाम दिया गया है।

मूंगा रेशम से हजारों वनवासियों को आजीविका साधन मिलेगा। इस नई उपलब्धि को 11 अगस्त 07 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने भी देखा तथा इसकी विस्तृत जानकारी ली है। कलेक्टर जीपी तिवारी ने मूंगा रेशम पालन योजना में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।