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दुकानों और कॉलोनियों को होगा फायदा

जयपुर: शहर की 70 हजार से अधिक अवैध रूप से बनी दुकानों और 300 से अधिक कॉलोनियों का नियमन किया जा सकेगा। जोधपुर में हुई मंत्रिमंडल की मीटिंग में लिए गए फैसले में नियमन की अड़चनें दूर कर दी गई हैं।

शहर में सबसे ज्यादा दुकानें कृषि भूमि पर बनी आवासीय कॉलोनियां व हाउसिंग बोर्ड, व जेडीए की एप्रूव्ड कॉलोनियों में हैं। शहर में किराना, डिपार्टमेंट स्टोर, शोरूम, किताब स्टेशनरी, एलपीजी बुकिंग आटा चक्की, होजरी, केबल फल, सब्जी, केबल टीवी, केमिस्ट गतिविधियां समेत कई तरह के व्यवसाय कर रहे हजारों लोगों को सरकार के इस फैसले से राहत मिलेगी। अब व्यवसायी चैन की नींद सो सकेंगे। तोड़फोड़ का खतरा नहीं रहेगा। नियमन होने पर व्यवसायियों को बैंक से आसानी से कर्ज भी मिल सकेगा।

पिछले कई सालों से आवासीय इलाकों में अवैध रूप से बनी दुकानों के नियमन का मामला अटका हुआ था। इनके नियमन को लेकर कई बार मांग भी उठी, लेकिन हर बार इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां नियमित नहीं की जा सकतीं।

न्यायालय के निर्देश पर जेडीए ने छह साल पूर्व आवासीय इलाकों में अवैध रूप से बनी दुकानों का सर्वे करवाकर तोड़ने की योजना भी बनाई लेकिन इसका क्रियान्वयन नहीं किया जा सका। डेढ़ साल पहले अवैध दुकानों का मामला विधानसभा में भी गूंजा। इस पर जेडीए ने न्यू सांगानेर रोड क्षेत्र के दुकानों को नोटिस देकर कार्रवाई का एलान किया, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। मंत्रिमंडल के फैसले से अब वर्ष 1999 से पूर्व की कृषि भूमि पर बसी उन कॉलोनियों के नियमन का रास्ता साफ हो गया है जिनमें 75 फीसदी तक आवासीय निर्मित एरिया है।

अभी तक 60 फीसदी निर्मित आवासीय एरिया तक ही नियमन किया जाना संभव था। वर्तमान में शहर की करीब 300 ऐसी कॉलोनियां है जिनमें गृह निर्माण सहकारी समितियों ने 75 फीसदी एरिया में भूखंड काट डाले और निर्माण हो गया। अब इन कॉलोनियों का नियमन 25 फीसदी सुविधा क्षेत्र होने पर भी किया जा सकेगा।

आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का नियमन कानून की खुली अवहेलना है। यह वृहद जनहित नहीं है। सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के फैसलों के विपरीत है। आवासीय इलाकों में दुकानों के नियमन से मास्टर प्लान की महत्ता ही खत्म हो गई है। देखा जाए तो मास्टर प्लान शहर के विकास का महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट होता है। मनमाने तरीके से मास्टर प्लान में पर्वितन से अनियोजित विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों की परेशानियां बढ़ेंगी। —राजदीपक रस्तोगी पूर्व सरकारी अधिवक्ता, जेडीए