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आजादी के साठ साल, बदला इंदौर का माहौल

इंदौर स्वास्थ्य : देशभर में ख्याति ा विश्व स्वास्थ्य संगठन और टेक्निकल कॉपरेरेशन मिशन (तब व्यवस्थाओं का आकलन करने वाली एजेंसी) की रेटिंग में इंदौर को देशभर में तीसरा-चौथा नंबर मिलता रहा।

>> महाराजा तुकोजीराव अस्पताल (एमटीएच) की ख्याति देशभर में थी। पूरे मध्यभारत से मरीज इलाज कराने आते थे। >> किंग एडवर्डस मेडिकल स्कूल में लाइसेंस फॉर क्लिनिकल मेडिकल प्रैक्टिस (एलसीएमपी) का कोर्स होता था जो आगरा यूनिवर्सिटी से संबद्ध था।

शिक्षा : कई सपूत दिए >> होलकर और क्रिश्चियन कॉलेज की ख्याति थी। पारंपरिक विषय पढ़ाए जाते थे। >> प्रोफेसर्स की गैलेक्सी में केमेस्ट्री के डॉ. भागवत और अंग्रेजी के प्रो. बोस, डॉ. बोरगांवकर, डॉ. पी.सी. जोशी, डॉ. केमकर, डॉ. इशा दास प्रमुख थे। इन कॉलेजों ने आजादी की लड़ाई लड़ने वाले कई सपूत भी दिए।

..और अब स्वास्थ्य : मेडिकल टूरिज्म सेंटर के रूप में बनी पहचान >> कोई रेटिंग तो नहीं होती लेकिन इंदौर की पहचान मेडिकल हब या मेडिकल टूरिज्म सेंटर के रूप में बन गई है। >> 1956 में बना एमवाय अस्पताल प्रदेशभर में बड़े अस्पताल के रूप में ख्यात हुआ और आज भी है। >> 2001 से 07 तक चार डॉक्टरों ने नेत्र, ब्रेन और फायब्रायड की सर्जरी में वल्र्ड रिकॉर्ड बनाए।

शिक्षा : स्टूडेंट्स फहरा रहे हैं विदेशों में परचम

>> इंदौर एजुकेशनल हब बनता जा रहा है। आईआईएम, इंटर यूनिवर्सिटी कन्सोर्शियम जैसी शिक्षण संस्थाएं हैं, जो देशभर में चुनिंदा जगहों पर हैं। >> शहर के 150 से ज्यादा कॉलेजों में 1 लाख बच्चे दूसरे राज्यों से पढ़ने आ रहे हैं। >> मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को 5 से 25 लाख रुपए सालाना तक के पैकेज मिल रहे हैं जो विदेशों में भी परचम लहरा रहे हैं।