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कोर्ट में उछलेगा पगड़ी मुद्दा

अमृतसर अकालतख्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने कहा है कि फ्रांस सरकार द्वारा पगड़ी पर पाबंदी लगाने का मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत में उठाया जाएगा।

उन्होंने फ्रांस सरकार द्वारा सिखों को पगड़ी पहनने की आज्ञा प्रदान नहीं करने को मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया है। इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकमत कायम करने के लिए सभी धर्मों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई है। मीटिंग क ी तारीख की घोषणा शीघ्र कर दी जाएगी।

जत्थेदार ने सिख समाज से फ्रांस में पगड़ी(दस्तार) विरोधी कानून को समाप्त करवाने के लिए शांतमय संघर्ष शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि पगड़ी पर लगी पाबंदी खत्म करवाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई सकारात्मक प्रयास न करने से साबित होता है कि सरकार सिखों के हितों की रक्षा करने के प्रति गंभीर नहीं, इसलिए सिख अब खुद यह जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहें।

फ्रांस सरकार द्वारा धार्मिक चिन्ह पहनने के बारे में बनाए गए कानून(सैकूलर्टी एंड कनसपयूकस रिलिजस सिलेबस एक्ट)की आड़ में सिखों की पगड़ी पर पाबंदी लगाए जाना सिखों की आजाद हस्ती और गुरुओं की ओर से सिखों को बख्शे गए सिखी स्वरुप को दूसरे धर्मो में मिलाने की साजिश है। गुरु पंथ द्वारा प्रमाणित सिख रहत मर्यादा के तहत पगड़ी सिख पहरावे का भिन्न अंग है। सिख के लिए पगड़ी विलक्ष्ण, स्वाभिमान,अलग पहचान का प्रतीक है। यूके और कैनेडा की सरकारों द्वारा विगत में पगड़ी पर लगाई गई पाबंदी समाप्त करवाने में सिखों ने शानदार जीत दर्ज की है। सिख फ्रांस में भी आंदोलन शुरू करने के लिए तैयार रहें।

सिखस टर्बन केस का विमोचनजत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने सिख लीगल फाउंडेशन के चीफ और सिख बुद्धिजीवी डा. एमएस राही द्वारा लिखित पुस्तक सिखस टर्बन केस का विमोचन किया। इस मौके पर उनके पीए पृथीपाल सिंह संधू भी मौजूद थे। यह पुस्तक फ्रांस सरकार द्वारा पगड़ी पर लगाई गई पाबंदी के कानूनी पहलुओं पर बारीकी से रोशनी डालती है।