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International International मक्का
इस्लाम के पवित्र शहर मक्का में उस घर को तलाशना मुश्किल है जहां मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था, लेकिन यहां अमेरिकी कॉफी शॉप %सिन्नाबोन% आराम से मिल जाएगी। यहां पैसा सिर चढ़कर बोल रहा है। शहर के ऐतिहासिक स्थानों पर चरमपंथियों और धन-कुबेरों दोनों का हमला हो रहा है।
कंक्रीट का जंगल : पवित्र काबा जाने वाले श्रद्धालुओं को रोज चारों तरफ कांच और संगमरमर की भव्य इमारतों के जाल से गुजरना पड़ रहा है। डेवलपर यहां ऊंची- ऊंची आलीशान इमारतें बनवा रहे हैं। धार्मिक उत्साही पिछले कई दशक से पुराने प्रतीकों को ध्वस्त करने के अपने काम में मगन हैं। उनका मानना है कि ये प्रतीक खुदा की इबादत करने की जगह बुत पूजा को बढ़ावा देते हैं। सऊदी आर्किटेक्ट सामी अंगावी कहते हैं, %मक्का मेरे लिए शहर नहीं है, यह एक पवित्र स्थान है। यह सहनशीलता और विभिन्नता भरा स्थान है। दुर्भाग्य है कि यह ऐसा ही नहीं रहेगा। आप आते हैं तो देखते हैं कि दिन पर दिन इमारतें और ऊंची से ऊंची और बड़ी से बड़ी होती जा रही हैं।
पैगंबर के पड़ोसी बनिए% :
अबराज अल-बैत सात टावरों के परिसर वाली एक इमारत है जो काबा से कुछ दूर ही बनाई गई है। इसके अपार्टमेंट के विज्ञापन में कहा जा रहा है कि पैगंबर के पड़ोसी बनें। काबा द हाउस आफ गॉड की तर्ज पर इस इमारत को टावर आफ द हाउस नाम दिया है। इसमें बने मॉल में फास्ट फूड और दुनिया के सारे नामचीन ब्रांड उपलब्ध हैं।
इमारत बूम का असर पैगंबर के जन्मस्थान पर होटल : 2002 में 200 वर्ष पुराना किला ढहाकर करोड़ों का आवासीय परिसर बनाया गया। माना जाता है कि जिस घर में पैगंबर पैदा हुए थे वहां अब भव्य रॉयल पैलेस और होटल बन गया है।
खादीजा का घर तोड़ा : पैगंबर की पहली पत्नी खदीजा के घर को भी नहीं बचाया जा सका। 1980 में सऊदी अधिकारियों के काबा के पास वाली मस्जिद को विस्तार देते समय यह नष्ट हो गया। मुस्लिम मान्यता है कि यहां पैगंबर को पहली बार कुरान का ज्ञान हुआ था।
बचाव की अपील: ब्रिटेन के इस्लामिक हैरिटेज एंड रिसर्च फाउंडेशन और अमेरिकी इंस्टीट्यूट फार गल्फ अफेयर्स सहित कई संस्थाएं इनके बचाव के लिए सामने आई हैं।