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नई दिल्ली:
देश की आजादी के समय 14 अगस्त 1947 की मध्य रात को पहली बार प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा फहराया गया झंडा गायब हो गया है।
संसद के सेंट्रल हॉल में जिस वक्त इस तिरंगे को फहराया गया था उस समय कई गण्मान्य लोगों के साथ भारत के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन भी उपस्थित थे।
15 अगस्त 1947 की सुबह साढ़े आठ बजे इंडिया गेट से यूनियन जैक को उतारकर तिरंगे को फहराया गया था। इस तिरंगे का भी कुछ पता नहीं चल पाया हे। इसके बाद 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर तिरंगे को फहराया गया था।
आजादी के 60 साल बीत जाने के बाद लोग इन तिरंगों के बारे में जानना चाहते हैं लेकिन इनका कुछ भी पता नहीं है। इस संबंध में कोई आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है कि आखिर ये एतिहासिक तिरंगे कहां हैं।
राष्ट्रीय संग्रहालय, लाल किले के संग्रहालय, नेशनल आर्काइव्स, नेहरू मेमोरियल, संसद के संग्रहालय और राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में भी ये उपलब्ध नहीं हैं।
आजादी की स्त्रक्वीं सालगिरह पर होने वालो आयोजन को कोर्डिनेट करने वाली संस्कृति मंत्रालय के पास भी इन तिरंगों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इस संबंध में संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह रक्षा मंत्रालय की तरफ से आयोजित होता रहा है इसलिए उन्हें इन तिरंगों के बारे में पता लगाना चाहिए।