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जयपुर : आजादी के साठ साल बाद क्या राजस्थान ऐसी छलांग लगा सकता है, जो उसे अगले 60 महीनों में वहां पहुंचा दे, जहां वह पिछले 60 साल में नहीं पहुंच पाया। यह संभव है, अगर सरकार ये छह फैसले कर ले। भास्कर ने राजस्थान के बेहतर भविष्य को लेकर मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, आईएएस अधिकारियों, उद्योगपतियों और विकास योजनाओं से जुड़े विशेषज्ञों से बात कर जाना कि ये छह फैसले कौन से हैं..
जल संकट से निजात पाने के लिए पंजाब से अपने हिस्से के 0.6 एमएएफ पानी को लेने का फैसला करना ही होगा। क्योंकि हालात ये हैं
>>राज्य में देश का 1.16त्न पानी, जबकि आबादी 6त्न है। >> प्रदेश के 236 जोन में से सिर्फ 32 ब्लॉकों में ही भूजल सुरक्षित। 86 डार्क जोन में। बाकी अत्यधिक दोहन वाले क्षेत्र। >> राज्य के 222 शहरों में से 158 में 24 घंटे, 64 में 48 घंटे और दो शहरों में 72 घंटे बाद जल आपूर्ति।
राजस्थान में रिफाइनरी लाने का फैसला करना होगा। ओएनजीसी न माने तो निजी क्षेत्र से प्रस्ताव मांगने चाहिए। क्योंकि हालात ये हैं >> रिफाइनरी नहीं तो एक लाख करोड़ का निवेश नहीं। >> तेल उत्पादन शुरू नहीं हुआ तो राजस्व नहीं मिलेगा। >> रिफाइनरी नहीं आई तो पश्चिमी राजस्थान में रोजगार का सपना तिरोहित हो जाएगा। >> .तो पेट्रो कॉम्पलेक्स की स्थापना भी नहीं होगी।
स्वास्थ्य और बाल विकास योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया को निचले स्तर तक दुरुस्त करना होगा। क्योंकि हालात ये हैं >>23 माह तक के 78 प्रतिशत बच्चों को प्रस्तावित वैक्सीन ही नहीं मिलती। >> तीन साल से कम उम्र के 44त्न बच्चों का वजन कम। >>20 प्रतिशत बच्चों का कद अपेक्षाकृत रूप से कम। >> 34 प्रतिशत बच्चे इतने कुपोषित कि विकास ही अवरुद्ध हो जाता है।
विभिन्न योजनाओं में हर साल 1000 करोड़ खर्च होते हैं। 60 साल से यही हो रहा है। योजनाओं की चौकसी जरूरी। क्योंकि हालात ये हैं >> 60.1त्न गर्भवती महिलाओं में खून की कमी। >> 15 से 49 साल की 61 प्रतिशत महिलाओं को पूरा खाना नहीं मिलता। >> प्रदेश की 72त्न महिलाएं अस्पताल नहीं जा पाती हैं। >> 14 से 17 साल की 84 प्रतिशत बालिकाओं को सैनेटरी नेपकिन के बारे में जानकारी नहीं।
राज्य में साक्षरता की स्थिति सुधारनी होगी। कई अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान इस क्षेत्र में पीछे है। क्योंकि हालात ये हैं
>> प्रति 1000 ग्रामीण घरों में से 703 में शिक्षित महिला और 326 में पढ़ा-लिखा व्यक्ति नहीं। >> 5 से 14 साल तक के 1000 में से 853 लड़के और 681 लड़कियां स्कूल जाती हैं। 15 से 19 साल वर्ग में यह आंकड़ा लड़कों में 510, लड़कियों में 218 ही है।
इंडस्ट्रियल प्रमोशन स्कीम पर फैसला लेना होगा। यह स्कीम 2003 में बनी थी। मार्च 2008 से पहले अंतिम रूप देना जरूरी।
क्योंकि हालात ये हैं
>> सेज सहित अन्य उद्योगों में निवेश की रफ्तार धीमी है। >> रोजगार के ज्यादा अवसर मौजूदा उद्योगों में नहीं हैं। >>औद्योगिक वातावरण में बदलाव का लाभ नहीं मिल रहा। >> आउटसर्ो्िसग और इनसर्ो्िसग के क्षेत्र में संभावनाओं को मूर्त रूप नहीं दिया जा रहा।
6 शक्तियों से बनेगा शक्तिमान भारत 1. sूमन पावर : सौ करोड़ लोगों को जनसंख्या वृद्धि का अभिशाप नहीं, मानव शक्ति के रूप में वरदान बनाना होगा। 2. नॉलेज पावर : मानव शक्ति का विकास कर उसे ज्ञान की शक्ति के रूप में पहचान देना होगा। 3. इकोनॉमिक पावर : नॉलेज पावर के जरिये इकोनॉमी को सर्वाधिक शक्तिशाली बनाना होगा। 4. न्यूक्लियर पावर : आर्थिक मजबूती के बाद ताकत चाहिए। इसलिए न्यूक्लियर पावर बनना होगा। 5. पॉलिटिकल पावर : न्यूक्लियर पावर के रूप में उभरते ही खुद को दुनियाभर में राजनीतिक शक्ति के रूप में साबित करना होगा। 6. सुपर पावर : ये पांच शक्तियां आते ही सिद्ध करना होगा कि हम ही हैं सुपर पावर।