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मर रहा है वीर रस

भोपाल आजादी की साठवीं सालगिरह आते-आते क्या देश में 'वीर रस' मरने लगा हैं? ज्यादातर साहित्यकार इसका जवाब 'हां' में दे रहे हैं। युवाओं से देशभक्ति की कविताओं या गीतों का टॉप-10 बनाने को कहें तो वे भी बगलें झांकने लगते हैं। शहर में ऐसा कोई कवि नहीं है जिसे देशभक्ति की कविताओं के लिए जाना जाता हो। भास्कर' ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कई साहित्यकारों और युवाओं से 'वीर रस' पर चर्चा की।

चेतना का अभाव ध्रुव शुक्ल, कविशुक्ल भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि 'वीर रस' अब नहीं दिखता। 'कवि प्रदीप के बाद राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत कविताएं लिखने वाला और प्रसिद्धि पाने वाला कोई नहीं हुआ। देशवासियों में ही वीरता का अभाव है, वीर खो गए हैं, तो कवियों के भीतर का वीर-भाव भी मर गया है।' शुक्ल कहते हैं, 'वीरों को जगाने वाली सांस्कृतिक-साहित्यिक चेतना अधमरी हो गई है।

कहां से जागे जज्बा?डॉ.विजय बहादुर सिंह, साहित्यकार कविता, इन दिनों खास प्रकार के विचार की राह पकड़ रही हैं। देशवासियों के भीतर गुस्सा है, त्रास है लेकिन वीरता या उत्साह नहीं है। ऐसे में वीर रस के कवि या कविता में वीर रस कहां से आएगा? यह सवाल है साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह का। वह कहते हैं, देश की वर्तमान राजनीति और अर्थनीति लोगों को पस्त कर रही हैं, देशभक्ति का जज्बा जागे कहां से?

कहां गए ऐसा लिखने वाले>> खूब लड़ी मर्दानी वह तो.. सुभद्राकुमारी चौहान>> पुष्प की अभिलाषा.. माखनलाल चतुर्वेदी>> कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ.. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'>> जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी इतिहास.. रामधारी सिंह 'दिनकर'>> ऐ मेरे वतन के लोगों.. कवि प्रदीप

और कहां हैं ऐसे बोल>> सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं..रामप्रसाद बिस्मिल>> दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल..कवि प्रदीप>> हिमाद्रि तुंग श्रंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती..जयशंकर प्रसाद>> वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो.. श्यामनारायण पांडेय

याद है केवल 'सारे जहां से अच्छा..'साहित्यकारों और कवियों से चर्चा करने के बाद हमने यह जानने की कोशिश की शहर के युवाओं को वीर रस की कितनी कविताएं या गीत याद हैं। देशभक्ति की 'कविताओं' के नाम पर स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स फिल्मी गीत ही दोहराते हैं। लॉ के स्टूडेंट प्रतीक कोरार को देशभक्ति के गीतों में 'सारे जहां से अच्छा..' ही भाता है, तो इंजीनियरिंग कर रहे कुणाल शर्मा को 'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी' याद आता है। उन्हें इस रचना के 'कवि या कवियित्री का नाम मालूम नहीं।'