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Personal Finance Personal Finance मुंबई: मकान खरीदते समय आप अपना धन लगाते हैं या कर्ज लेते हैं। आप टैक्स में बचत करना चाहते हैं तो कर्ज लेना अच्छा है, क्योंकि अपना धन इस्तेमाल करने से कोई टैक्स लाभ नहीं है।
कैसे लें लाभ: संपत्ति में दो हिस्सेदार बनकर प्रत्येक को टैक्स छूट का लाभ उठाना चाहिए। भागीदारों को लोन में भी सह आवेदक बनना चाहिए। अगर पति-पत्नी भागीदार बनते हैं तो दोनों की हिस्सेदारी बराबर होनी चाहिए। लोन भी बराबर लेना चाहिए। दोनों के ब्याज व मूलधन का भुगतान अलग-अलग होना चाहिए। प्रत्येक को सेक्शन 24 के तहत डेढ़ लाख तक का ब्याज डिडक्शन मिलेगा। सेक्शन 80 सी में एक लाख रुपए तक का डिडक्शन मिलेगा। इस तरह दोनों मिलकर पांच लाख रुपए तक की आय टैक्स से बचा सकते हैं।
दूसरी संपत्ति: स्रोत पर ही आयकर कटौती में ब्याज पर डेढ़ लाख और मूलधन पर एक लाख तक की छूटों को टीडीएस की गणना में गिना जाता है। अगर यह कर्मचारी दूसरी संपत्ति खरीद लेता है तो टीडीएस की गणना में इसे छूट में शामिल नहीं किया जाएगा। सीबीडीटी ने साफ कहा है कि दूसरी संपत्तियों के हाउसिंग लोन ब्याज पर वेतन पर टीडीएस में छूट उपलब्ध नहीं है। संपत्ति खुद रखें या किराए पर दें। टैक्स डिडक्शन तो पहले की तरह होगा, लेकिन टैक्स रिटर्न के जरिए टैक्स छूट का क्लेम करना चाहिए।
-हाउसिंग लोन पर डेढ़ लाख तक का ब्याज टैक्स डिडक्टेबल है। एक लाख रुपए तक का पूंजीगत भुगतान सेक्शन 80सी डिडक्शन का पात्र है। क्या करें: अगर आप मकान की पूरी कीमत भी चुका सकते हों तब भी लोन लेकर छूट हासिल करें। -किसी मकान व लोन में किसी दंपती की समान हिस्सेदारी है तो पांच लाख रुपए तक की आय पर टैक्स (प्रत्येक ढाई लाख) बचाया जा सकता है। क्या करें : मकान में समान हिस्सेदारी करें। साझा लोन लें। -दूसरी संपत्ति पर ब्याज में जाने वाली पूरी राशि टैक्स डिडक्टेबल है। इसका मतलब कम टीडीएस नहीं है। क्या करें : दूसरी संपत्ति पर टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय टैक्स लाभों का फायदा उठाएं।