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80 फीसदी सीटें देने से कोर्ट का इनकार

भोपाल निजी व्यावसायिक कालेजों द्वारा मैनेजमेंट कोटे में 80 प्रतिशत सीटें देने के लिए की गई अपील को सोमवार को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक 15 प्रतिशत सीटें खाली रखने की स्थिति ही कायम रहेगी।

निजी कालेजों ने हाई कोर्ट में पिछले सप्ताह मनेजमेंट कोटे में 80 प्रतिशत सीटें दिए जाने की अपील की थी। इस पर सोमवार को सुनवाई की गई। जबलपुर से मिली जानकारी के अनुसार कोर्ट ने अलग प्रवेश परीक्षा न करा सकने के आधार पर निजी कालेजों की इस मांग को खारिज कर दिया है।

दरअसल, निजी कालेजों की ओर से की गई अपील में वे कालेज भी शामिल थे, जिन्होंने अलग से प्रवेश परीक्षा कराने में अपनी असहमति प्रवेश समिति को दी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले से निजी कालेज संचालकों की मैनेजमेंट कोटा की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब एसोसिएशन को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है। इसमें मैनेजमेंट कोटा की 15 प्रतिशत सीटों पर एनआरआई उम्मीदवार न मिलने पर खाली सीटों के बारे में फैसला किया जाना है। यह सुनवाई अगस्त के तीसरे सप्ताह में होनी है।

क्या था मामला इस बार निजी कालेजों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2005 में दी गई व्यवस्था के आधार पर अपील की थी। इसमें 85 प्रतिशत सीटों के लिए निजी कालेजों को संयुक्त प्रवेश परीक्षा द्वारा प्रवेश करने के अधिकार दिए गए थे। इस आधार निजी कालेजों ने अपनी प्रवेश परीक्षा करवानी चाही थी, लेकिन जस्टिस चंद्रेश भूषण प्रवेश कमेटी को कुछ निजी कालेजों ने अपनी असहमति लिखित में भेज दी थी। इसलिए परीक्षा नहीं करवाई जा सकी। उसी असहमति को इस बार हाई कोर्ट ने अपने फैसले का आधार बनाया है। कोर्ट ने कहा है कि एक साथ प्रवेश परीक्षा न करा पाने से कोटे का लाभ दिया जाना संभव नहीं है।