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खेलों से भी है अपने जिलों की पहचान

रेवाड़ी खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित की गई राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता के आधार पर बनाई गई रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के सभी 20 जिलों की अलग-अलग खेलों में अपनी खास पहचान बन चुकी है।

कुश्ती के लिए झज्जर के पहलवान याद आ जाते हैं। बॉक्सिंग का जिक्र करने पर भिवानी की तस्वीर सामने घूमने लगती है। हॉकी का नाम लेते ही गुड़गांव के खिलाड़ी नजरों के सामने दौड़ने लगते हैं।

फुटबाल के लिए रेवाड़ी के खिलाड़ियों की पीठ थपथपाने का मन करता है। यानि कोई ना कोई खेल जिले की पहचान बन जाता है। कबड्डी में हरियाणा की देश में ही नहीं विश्वस्तर पर अपनी पहचान है। भारत की कबड्डी में आज भी अधिकांश हरियाणा के खिलाड़ी हैंै।

राज्य में जिलास्तर पर बेहतर खिलाड़ियों की बात की जाए तो अधिकांश खिलाड़ी भिवानी, सोनीपत, रोहतक, हिसार, जींद के मिलेंगे। इसी तरह बॉक्सिंग में भी अंतरराष्ट्रीयस्तर पर भारत के प्रतिनिधित्व के रूप में हरियाणा का दबदबा है।

राज्य में यह श्रेय भिवानी के साथ हिसार व रेवाड़ी (लड़कियों में) को मिलता है। वॉलीबाल में करनाल, कुरुक्षेत्र, भिवानी की अपनी पहचान है। फुटबाल में रेवाड़ी, गुड़गांव, सोनीपत, हिसार व रोहतक व अंबाला के खिलाड़ियों ने हरियाणा का नाम खेल में भारत के मानचित्र पर रोशन किया है।

हैंडबाल में जींद पानीपत, फतेहाबाद, पंचकूला व रेवाड़ी की अपनी अलग पहचान बन चुकी है। हॉकी में गुड़गांव के साथ कुरुक्षेत्र का शाहबाद व सोनीपत ने अपने जिलों का दबदबा है। एथलेटिक में फरीदाबाद के अलावा सिरसा, सोनीपत, हिसार, भिवानी व रोहतक का दबदबा रहा है।

खेल कल्चर होने के कारण अपनी-अपनी पहचान : बूरा खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के वरिष्ठ कोच सुरेंद्र सिंह बूरा के मुताबिक प्रत्येक जिले का अपना खेल कल्चर है। अगर जिले का खिलाड़ी किसी खेल में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना लेता है तो वहां उस खेल का कल्चर स्वत: बनना शुरू हो जाता है। खिलाड़ियों की वजह से जिले की भी अपनी पहचान बन जाती है।





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