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पॉजीटिव थिंकिंग और कॉन्फिडेंट से भरी इस बहादुर महिला को देखकर यह कह पाना मुश्किल था कि पिछले दो साल से वह एचआईवी से पूरी हिम्मत के साथ न सिर्फ खुद मुकाबला कर रही हैं, बल्कि इससे पीड़ित अनेकों लोगों को इससे लड़ने का हौसला दे रही हैं। पूजा ठाकुर से 'भास्कर' की मुलाकात हुई ड्रॉपिन सेंटर, सेक्टर-15 में।
खुद को संभाला पीपुल लिविंग विद एचआईवी-एड्स (पीएलएचए) की प्रेजिडेंट पूजा ठाकुर बताती हैं 'जुलाई 2005 में पति की अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया। टेस्ट कराने के बाद पता चला कि उन्हें एचआईवी पॉजीटिव है। एचआईवी का नाम सुनकर मैं परेशान हो गई। उसके बाद डॉक्टर ने मुझे खुद का और दोनों बेटों का टेस्ट कराने के लिए कहा। मेरे छोटे बेटे और मेरी टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। जैसे ही मुझे पता चला कि मुझे और छोटे बेटे को भी एचआईवी पॉजिटिव है तो मैं खुद को कमजोर महसूस करने लगी और रोने लगी। पर दूसरे ही पल मैंने खुद को संभाला और मन ही मन इस कठिन परिस्थिति का मुकाबला करने का फैसला लिया, लेकिन परेशानियों का यह अंत नहीं था। मेरे ससुराल वाले यह मनाने को तैयार ही नहीं हुए कि मेरे पति को एचआईवी पॉजिटिव है। वे लोग यह कह कर उन्हें गांव ले गए कि उन्हें कोई बीमारी नहीं बल्कि भूत लग गया है। सही इलाज न हो पाने की वजह से 3 अक्टूबर, 2005 को उनकी मौत हो गई।'
'परेशानियों ने बनाया और मजबूत'
पूजा बताती हैं 'पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने मुझे और मेरे दोनों बेटों को अपने साथ रखने से मना कर दिया। हर दिन आ रही नई परेशानियां मुझे और मजबूत करती जा रही थीं। मैं बेटों को लेकर चंडीगढ़ आ गई। तभी मेरी मुलाकात एड्स कंट्रोल सोसायटी की डायरेक्टर सोनिया त्रिखा से हुई। उन्होंने मुझे हौसला दिया। धीरे-धीरे मेरी सोच पॉजीटिव होने लगी और मैंने सोच लिया कि अगर मरना ही है तो क्यों न बहादुरी से और कुछ करके मरा जाए। सोनिया जी ने मुझे पीएलएचए के साथ जुड़ने का मौका दिया। 18 नवंबर, 2005 को मुझे पीएलएचए का प्रेजिडेंट बना दिया। पीएलएचए के साथ काम करने केबाद इनके अधिकारों के लिए लड़ना और इन्हें सोशल स्टिग्मा से बाहर निकालना मेरा ध्येय बन गया।'
खुद को स्वस्थ महसूस कर रही हूं : पूजा पूजा ने बताया कि एचआईवी से लड़ते हुए उन्हें दो साल हो गए हैं और पीजीआई में ट्रीटमेंट चल रहा है। जब से ट्रीटमेंट शुरू हुआ है, 'मैं दिन-ब-दिन खुद को स्वस्थ महसूस कर रही हूं और बिना किसी परेशानी के काम कर रही हूं। यही बात मैं एचआईवी पॉजीटिव लोगों से कहना चाहती हूं कि एचआईवी होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप सारे काम छोड़ कर बैठ जाएं, बल्कि सही ट्रीटमेंट लेकर बिना किसी परेशानी के एचआईवी के साथ भी जिया जा सकता है।'