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आरक्षण नहीं तो जीवन नहीं

आभानेरी (दौसा): reservation गुर्जर आरक्षण आंदोलन की अगुवाई कर रहे कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने बुधवार को आभानेरी की महापंचायत में गुर्जरों को भरोसा दिलाया कि आरक्षण जरूर मिलेगा। वे पन्द्रह दिन का धैर्य रखें। उनके पक्ष में चिट्ठी जरूर जाएगी। इसका उन्हें पूरा भरोसा है। बैसला ने कहा कि वे आरक्षण लेकर ही जिंदा रहेंगे। यदि आरक्षण नहीं मिला तो वे भी जिंदा नहीं रहेंगे। वह अगले कदम की घोषणा 13 सितंबर को धौलपुर की महापंचायत में करेंगे। उनकी घोषणा का इंतजार करें और तब तक शांति बनाए रखें।

आभानेरी के बाहर जंगल में हुई महापंचायत में बैसला ने गुर्जरों से आग्रह किया कि मेरी हिम्मत बढ़ाएं। मेरे हाथ मजबूत करें। मेरे काम में बाधा नहीं डालें, क्योंकि काम बहुत करना है। सरकार ने समझौते के बाद कोई वादाखिलाफी नहीं की है। चौपड़ा कमेटी अपना काम कर रही है। हमें कमेटी पर पूरा भरोसा है, लेकिन उसे गुर्जरों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा सबूत देने पड़ेंगे। बैसला और अन्य गुर्जर नेताओं ने समाज के लोगों से 13 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में धौलपुर पहुंचने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय युवा गुर्जर महासभा के बैनर पर हुई महापंचायत में फरीदाबाद के सांसद अवतारसिंह भडा़ना, पूर्व मुख्य सचेतक हरिसिंह महुआ, बयाना के विधायक अतरसिंह भड़ाना, नगर के पूर्व विधायक गोपी गुर्जर, मध्य प्रदेश के देवेन्द्र पटेल, राजस्थान गुर्जर युवा महासभा के अध्यक्ष डॉ. विक्रमसिंह गुर्जर, मंजू सेंदडा, जयपुर नगर निगम में मुख्य सचेतक मनमोहनसिंह, मानसिंह गुर्जर, कैप्टन जगराम, हरप्रसाद और डॉ.रूपसिंह सहित कई वक्ताओं ने कर्नल में विश्वास व्यक्त किया। सभी वक्ताओं ने आरक्षण लेने के लिए कर्नल किरोड़ी के नेतृत्व में ही संघर्ष का ऐलान किया।

बैसला ने बयां किया दिल का दर्द : वसुंधरा सरकार के साथ हुए समझौते पर बार-बार अंगुलियां उठने से बैसला काफी आहत दिखे। उन्होंने भाजपा से निष्कासित विधायक प्रहलाद गुंजल सहित भाजपा विधायकों को आड़े हाथों लिया। बैसला ने कहा कि आज जो लोग उनके फैसले पर अंगुली उठा रहे हैं वे साढ़े तीन साल से विधायक हैं गुर्जर आरक्षण की मांग पर तीन मिनट भी बोले हों तो बताएं। उन्होंने कहा कि बूंदी में जिस वक्त निहत्थे लोगों पर पुलिस ने गोली चलाई उस समय वे कहां थे।

बैसला ने कहा कि उन पर सरकार से पांच करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया गया। उनके बारे में तरह-तरह की बातें की जा रही हैं । यह बात सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि यदि समाज का इतना ही दर्द है तो चौपड़ा कमेटी के सामने पक्ष रखने आज तक क्यों नहीं गए। उन्होंने समाज की बहन-बेटियों से आह्वान किया कि वे खुद उनके साथ जाकर चौपड़ा कमेटी के सामने अपना पक्ष रखें।

खुलकर सामने आए गुर्जर नेताओं के मतभेद:
झालरा पाटन की महापंचायत से गुर्जर नेताओं के दिलों में आई दरार बुधवार को आभानेरी में भी साफ दिखी। मंच से बार-बार आरक्षण, सामाजिक एकजुटता की अपील करने के बावजूद गुर्जर नेता एक-दूसरे पर छींटाकशी करने से नहीं चूके । मंच पर उस समय स्थिति ज्यादा बिगड़ गई जब राष्ट्रीय गुर्जर चेतना मंच के अध्यक्ष राजेन्द्रसिंह विधूड़ी ने पूर्व मुख्य सचेतक हरिसिंह महुआ की इस बात पर आपत्ति की कि दिल्ली हरियाणा के लोग हैलीकॉप्टरों से आकर गुर्जर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।

विधूड़ी ने मुख्यमंत्री वसुंधराराजे पर जमकर प्रहार किए और कहा कि वसुंधरा को समधण कहने में गुर्जरों को शर्म आती है। इस बीच गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता डॉ. रूपसिंह ने उन्हें बिठाने की कोशिश की। विधूड़ी चुप नहीं हुए और उन्होंने मुख्यमंत्री वसुंधराराजे को राजस्थान से भगाने के लिए अपनी सारी संपत्ति दांव पर लगाने की घोषणा कर दी।

मुख्यमंत्री पर गरजे गुंजल भी:
भाजपा से निष्कासित विधायक प्रहलाद गुंजल भी बुधवार को आभानेरी में मुख्यमंत्री वसुंधराराजे पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि फिरंगी मानसिकता वाली मुख्यमंत्री ने राजस्थान के सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का काम किया है। चुनाव से पहले गुर्जरों की समधण बनकर वोट मांगे बाद में निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाई।ं उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राजस्थान को अपना परिवार और गुर्जरों को दिल का टुकड़ा बताती है, लेकिन परिजनों और दिल के टुकड़ों पर गोलियां नहीं चलाई जाती। गुंजल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राजे ने लालसोट में गुर्जर-मीणाओं को लड़ाया। उदयपुर के ऋषभदेव में भील आदिवासी और जैनियों को लड़ाया। अलवर में मेव और सिखों को लड़ाया। जयपुर में विश्व हिंदू परिषद के दो टुकड़े करवा दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं किया जा सकता ।

गुंजल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह से आग्रह किया कि वे या तो गुर्जरों की हत्यारी वसुंधरा की राजस्थान से विदाई कर दें, नहीं तो यहां भारतीय जनता पार्टी की ही विदाई हो जाएगी। उन्होंने आंदोलन की अगुवाई कर रहे कर्नल किरोड़ीसिंह से भी आग्रह किया कि वे साझा रणनीति बनाकर ही इस आंदोलन को चलाएं। कहीं ऐसा न हो गुर्जर 100 दिन की लड़ाई राजनीति की टेबल पर दो घंटे में हार जाएं।

बैसला ने विरोधियों पर चलाए दर्द भरे तीर:
1. मुख्यमंत्री से हुए समझौते पर जो लोग उंगली उठा रहे हैं वे साढ़े तीन साल से विधायक हैं पर उन्हीं से पूछिए- क्या आरक्षण पर कभी तीन मिनट भी बोले हैं।
2. वे मुझ पर सरकार से पांच करोड़ रु. लेने का आरोप लगा रहे हैं। जो गलत है। अगर उन्हें समाज का इतना ही दर्द है तो चौपड़ा कमेटी में अब तक पक्ष क्यों नहीं रखा।
3. अगर आरक्षण लेना है तो मेरे काम में हाथ बंटाएं, अडं़गे लगाने से बनता काम बिगड़ सकता है। मुझे विश्वास है सरकार चिट्ठी जरूर भेजेगी।

अकेले बैसला पर कैसे करें भरोसा : गुंजल
सिकंदरा:
आभानेरी गुर्जर महापंचायत में भाग लेने जा रहे भाजपा से निष्कासित रामगंज मंड़ी विधायक प्रहलाद गुंजल यहां पत्रकारों के सामने कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा हम कर्नल के भरोसे सारी बातें छोड़ देंगे तो क्या गारंटी है कि 100 दिन की आग का फैसला फिर 2 मिनट में गलत नहीं कर आएंगे। नेतृत्व में वनमैन की भूमिका गौण होनी चाहिए। हम कर्नल बैसला का सम्मान करते है। सबको अपना बहम निकाल देना चाहिए कि यह आंदोलन उनके पीछे चल रहा है।

हकीकत तो यह है कि यह आंदोलन उन 26 शहीदों की शहादत पर खड़ा है और हम आज भी शाहदत को बेकार नहीं होना देने चाहते है। उन्होंने कहा कि जब पाटोली आंदोलन के दौरान देश में समाज के 26 जवान शहीद हो चुके थे और पूरे देश का गुर्जर आंदोलन की राह पर उतर आया था और यह आंदोलन देश का आंदोलन हो गया था। उस समय कर्नल अकेले में जाकर सरकार से समझौता कर आए। यदि वे 24 घंटे और ठहर जाते तो आज हमे 100 दिन और आग में नहीं कूदना पड़ता। यह कोई अकेले कर्नल की लड़ाई नहीं है बल्कि फील्ड की लड़ाई है ऐसे में धौलपुर महापंचायत में संयुक्त निर्णय स्वीकार किया जाएगा।





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