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नई दिल्ली: एटमी करार पर वाम दलों की शंकाओं और आपत्तियों को दूर करने के लिए चार दिनों की माथापच्ची के बाद आखिरकार मंगलवार को 15 सदस्यीय समिति का एलान कर दिया गया। कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी इसके संयोजक होंगे। समिति में कांग्रेस और वामदलों के छह-छह प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
वाम मोर्चे की तरफ से भाकपा और माकपा के दो-दो व आरएसपी और फारवर्ड ब्लॉक के एक-एक प्रतिनिधि को इसमें स्थान मिला है। यूपीए के घटक दलों-राजद, डीएमके और राकांपा के एक-एक नुमाइंदे को भी इसमें शामिल किया गया है। करार पर तीन हफ्ते तक चले गतिरोध के बाद बीते गुरुवार को वाम दलों और यूपीए के बीच समिति बनाने पर सहमति हुई थी।
हालांकि मंगलवार को दिन में मुखर्जी ने पत्रकारों से चर्चा में कहा था कि समिति के गठन में एक-दो दिन लग सकते हैं, लेकिन देर रात उन्होंने ही इसकी घोषणा कर दी। उन्होंने यह नहीं बताया कि समिति कब तक रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि समिति की पहली बैठक की तारीख जल्द तय की जाएगी।
क्या करेगी समिति :
* समिति ‘123 समझौते’ के उन पहलुओं की पड़ताल करेगी जिन पर वाम दलों को एतराज है।
* यह देखा जाएगा कि अमेरिकी कानून हाइड एक्ट का परमाणु द्विपक्षीय समझौते और परमाणु क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता पर क्या असर पड़ेगा।
* समिति सुरक्षा सहयोग और विदेश नीति पर करार के असर का अध्ययन भी करेगी।
कामरेडों के तीखे स्वर जारी :
* ‘सरकार देश को अमेरिकी खेमे में शामिल करने पर तुली है। साझा न्यूनतम कार्यक्रम में ऐसा नहीं है। करार पर अमल नहीं रोका तो उसे नतीजे भुगतने पड़ेंगे।’
- ज्योति बसु, माकपा के बुजुर्ग नेता
* ‘समिति की रिपोर्ट आने तक सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में बात नहीं करनी चाहिए। यदि सरकार ऐसा करने से बाज नहीं आती तो फिर हम देखेंगे इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।’
- प्रकाश करात, माकपा महासचिव
समिति में कौन-कौन
कांग्रेस के प्रणव मुखर्जी (संयोजक), उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी- एके एंटनी, कपिल सिब्बल, सैफुद्दीन सोज, पी चिदंबरम और पृथ्वीराज चव्हाण।
यूपीए के घटक दलों के लालू प्रसाद (राजद), टीआर बालू (डीएमके) और शरद पवार (राकांपा)। वाम दलों के प्रकाश करात और सीताराम येचुरी (माकपा), एबी बर्धन और डी राजा (भाकपा), देवव्रत विश्वास (फारवर्ड ब्लॉक) व टीजे चंद्रचूड़न (आएसपी)।