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जयपुर: राज्य सरकार के संकट मोचकों को मंगलवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पक्ष में उतारे गए दलित विधायकों ने मंत्रिमंडल में दलित विधायकों की संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग रख दी। इन विधायकों ने मांग की है कि 29 सदस्यों के मंत्रिमंडल में सात विधायक हों तो ही जातीय संतुलन बनता है। अभी सिर्फ तीन ही दलित मंत्री हैं।
दलित विधायकों ने कहा कि मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व के लिए वे जल्द ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष महेशचंद्र शर्मा से मिलेंगे। इन विधायकों का कहना है कि कैबिनेट स्तर के 14 मंत्रियों में कम से कम तीन दलित मंत्री होने चाहिए, जबकि अभी सिर्फ एक ही दलित कैबिनेट स्तर का मंत्री है।
दलित विधायकों के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल में दलितों का प्रतिनिधित्व सिर्फ 10 प्रतिशत है, जो 22 प्रतिशत होना चाहिए, क्योंकि 118 विधायकों में से अनुसूचित जाति के 26 विधायक हैं। दलित विधायकों में भाजपा के गोविंद मेघवाल, नंदलाल बंशीवाल, राकेश मेघवाल, केडी बाबर और लक्ष्मीनारायण बैरवा थे। इन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी मांगों से सभी दलित विधायक सहमत हैं।
दलित विधायकों ने बताया कि वे सामाजिक समरसता के लिए समन्वय समिति बनाकर सभी वर्र्गो को जोड़ने के काम में जुटेंगे। यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा।
क्या-क्या कहा दलित विधायकों ने?
दलित विधायक नेताओं के मनमुटाव से दुखी थे। उन्होंने पचेरवाल को तो खारिज कर दिया लेकिन मेघवाल को कोसने और मुख्यमंत्री को भली बताने से भी नहीं चूके। मीटिंग में जो कहा उन्हीं के शब्दों में..
1. ये तो मीटिंग-मीटिंग खेलते रहते हैं। कोई फैसला थोड़े होता है। सवा साल बाद चुनाव हैं। हमें जनता में जाना है। ये तो कहीं से भी चुनाव लड़ लेंगे। दिक्कत तो हमें है। ये सब हमें क्यों तबाह करने पर तुले हैं। लोग हमारे कार्यो की चर्चा तो करते नहीं नेताओं के झगड़े देख हमें कोसते रहते हैं।
2. वसुंधरा को लाया कौन था? वो तो दिल्ली में थीं। कैलाश मेघवाल में ही दम होता तो ये नौबत क्यों आती? मेघवाल ने आज तक कभी दलित विधायकों को एक बार बुलाकर पूछा हो तो बताओ?
3. कैलाश मेघवाल ने आज तक दलितों के लिए किया क्या? उन्हें यह शोभा नहीं देता कि वे मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाएं। वे समाज हित में नहीं, स्वार्थाें के वशीभूत होकर आरोप लगा रहे हैं।
4. आज चुनाव में हमारी हालत बिगड़ रही है। कांग्रेस सोई पड़ी है। कांग्रेस के नेता वसुंधरा के राज का मजा ले रहे हैं। भाजपा में वसुंधरा के अलावा कोई नेता नहीं है। कोई एक भी हो तो नाम बताओ।
5. किसी भी नेता को पार्टी में शामिल करने से पहले उस क्षेत्र के विधायकों से बातचीत अवश्य की जानी चाहिए। विधायकों की राय के बिना किसी भी बाहरी नेता को पार्टी में लेना गलत है।
मुझे पूरा राजस्थान जानता है
विधायक जो कुछ भी कहें, कहने दीजिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पूरा राजस्थान जानता है कि मैं कैसा हूं।
—कैलाश मेघवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
‘जमानत होने से नहीं धुलते दाग’
पांचों दलित विधायकों ने एक सुर साधा और बोले, ‘‘जमानत हो जाने से गोपाल पचेरवाल का अपराध कम नहीं हो जाता। माना कि वे दागी हैं, लेकिन उन्हें पार्टी में शामिल करना गलत नहीं है। दलित विधायकों ने कहा कि वे कैलाश मेघवाल को तो नेता मानते हैं, लेकिन पचेरवाल को नेता नहीं मानते।
न पार्टी समझ आई, न नेता!
गोविंद मेघवाल ने कहा, मैं जनता दल से भाजपा में आया हूं, न तो ये पार्टी समझ आई और न इसके नेता। इतनी भली मुख्यमंत्री हैं, उन पर आरोप लगाते हैं। देवता जैसा अध्यक्ष है, उसे कोसते हैं। मैंने देखा है, नेता पहले मीडिया में ब्रीफिंग करते हैं। अगले दिन पढ़ता हूं तो उसी नेता के हवाले से छपा होता है, टिप्पणी से इनकार।