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International International टोक्यो:
शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान माना गया है, लेकिन दुनिया के हर कोने में पवित्र माना जाने वाला यह दूध भी अब प्रदूषण की भेंट चढ़ गया है। यह खुलासा यहां ‘डायोक्सिन 2007’ के नाम से शुरू हुए इंटरनेशनल कांफ्रेंस के दौरान जापान के वैज्ञानिकों ने किया है।
इन वैज्ञानिकों ने बुधवार को एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि जापान में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में पॉलिक्लोरिनेटेड बायफिनाइल (पीसीबी) नाम का बेहद घातक पदार्थ पाया गया है। इस पदार्थ के साथ ही माताओं के दूध में ब्रोमिनेटेड कोप्लानर बायफिनाइल्स (को-पीएक्सबी) भी मिला है, जिससे वैज्ञानिकों की चिंता और बढ़ गई है।
ऐसी आशंका व्यक्त की गई है कि अध्ययन के लिए चुनी गई माताओं के दूध में यह घातक पदार्थ समुद्री मछलियों के जरिए आया है। को-पीएक्सबी समुद्री मछलियों, खासतौर पर अंटार्कटिक महासागर की ‘मिंक’ व्हेल मछलियों में पाया जाता है। अब तक को-पीएक्सबी को कम हानिकारक माना जाता रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भी पीसीबी के समान ही घातक है।
रिसर्च टीम की प्रमुख और सेतसूनान यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर सोईची ओता ने कहा है कि इंसान के शरीर में इन घातक पदार्र्थो की मौजूदगी का यह पहला ही प्रमाण है।
क्या है पीसीबी: पीसीबी एक कार्बनिक यौगिक है। कूलिंग एजेंट या पीवीसी के पाइपों में कोटिंग के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे हो रहा है प्रदूषण: औद्योगिक कचरे को समुद्र में बहाने के कारण कई बार यह मछलियों के पेट में पहुंच जाता है।
मानव शरीर पर असर: मानव शरीर में इसके प्रभाव से त्वचा रोग, लिवर की बीमारी के अलावा कैंसर भी हो सकता है। स्तनपान के जरिए पीसीबी नवजात शिशुओं के शरीर में पहुंचकर उनकी याददाश्त को कमजोर करने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।