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धमकियां और धमाके

जब किसी शासक का नैतिक बल कमजोर हो जाता है, तो उसे हर ओर से चुनौतियां मिलने लगती हैं। यही हाल इस समय पाकिस्तान के शासक जनरल परवेज मुशर्रफ का भी है। सत्ता पर पकड़ जरा-सी कमजोर पड़ते ही उन्हें राजनीति, न्यायपालिका और कानून व्यवस्था, हर मोर्चे पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को रावलपिंडी में हुए दो धमाके मुशर्रफ के शासन-तंत्र को खुली चुनौती हैं। कहने को तो इन धमाकों में 29 लोग मारे गए और 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं, लेकिन वास्तव में तो इन धमाकों में राज-भय की हत्या हुई है और कानून व्यवस्था घायल है।

उधर, राजनीतिक मोर्चे पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। पाकिस्तान में हुए सर्वेक्षणों में उनकी लोकप्रियता शिखर पर है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की छूट भी दे दी है। न्यायपालिका अपने आप में मुशर्रफ के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। हाल में कम से कम दो बार न्यायपालिका उन्हें तगड़ा झटका दे चुकी है। पहला झटका तेरह जजों की बेंच ने निलंबित चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी को बहाल करके दिया और बहाल होने के बाद चौधरी ने दूसरा झटका इस फैसले से दिया कि नवाज शरीफ को स्वदेश लौटने का पूरा अधिकार है।

नवाज शरीफ के पाकिस्तान लौटने की संभावनाओं ने मुशर्रफ को खौफजदा कर दिया है और वे धमकी की भाषा पर उतर आए हैं। शरीफ को गिरफ्तारी का भय दिखाया जा रहा है, लेकिन उन पर धमकियों का कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा। वे स्वदेश लौटने को लेकर दृढ़ हैं। जस्टिस चौधरी तो मुशर्रफ की धमकियों से डरने की बजाय खुलकर सड़क पर आ ही गए थे, आतंकवादी भी उनकी धमकियों के जवाब में धमाके कर रहे हैं। इस बीच आपातकाल लगाने की बात भी आई, लेकिन सरकार फिर पीछे हट गई।

कुछ समय पहले तक बेनजीर भुट्टो मुशर्रफ से समझौता करने को तत्पर नजर आ रही थीं, लेकिन जनरल की पकड़ कमजोर पड़ती देख वे भी नई-नई शर्ते रखने लगी हैं। अब वे कह रही हैं कि मुशर्रफ फौजी वर्दी उतारेंगे तभी कोई समझौता होगा। मुशर्रफ कभी कहते हैं कि फौजी वर्दी उनके शरीर से खाल की तरह चिपकी हुई है, तो कभी कहते हैं कि यदि राजनीतिक पार्टियां उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया जाने दें तो वे वर्दी उतारने को तैयार हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान में अराजकता का माहौल बढ़ता जा रहा है और इस माहौल का लाभ आतंकवादी संगठन उठा रहे हैं। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब-जब पाकिस्तान में भीतरी उथल-पुथल मचती है, उसका असर हमारे देश पर भी पड़ता है।





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