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शहरी गांवों में प्लाट की रजिस्ट्री महंगी

भोपाल: भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के शहरी गांवों में 25 अगस्त से रजिस्ट्री कराना तीन से चार गुना महंगा कर दिया गया है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा चारों स्थानों के शहरी क्षेत्र से लगे विशिष्ट गांवों में कलेक्टर गाइड लाइन के नियम बदले जाने से यह स्थिति निर्मित हुई है। इन नियमों के कारण अब शहरी क्षेत्र से लगे गांवों के कृषि भूमि पर मौजूद अविकसित और कृषि भूमि प्लाट की कीमत ज्यादा हो जाएगी, जिससे उसकी रजिस्ट्री के दौरान खरीदार को पहले की तुलना में काफी ड्यूटी देनी होगी।

सूत्रों के मुताबिक नियम बदले जाने के पीछे शासन का मानना है कि चारों शहरों में शहरी क्षेत्र से लगी जमीन पर भू-माफिया की नजर है। ये लोग लाभ कमाने के लिए औने-पौने दाम में जमीन को खरीदकर रख लेते हैं और फिर ऊंची कीमत पर सौदेबाजी करते हैं। जबकि पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग से जुड़े अफसर और वकील कहते हैं कि इससे आम लोगों पर ज्यादा आर्थिक भार पड़ेगा। अभी जिस जमीन की कीमत छह से आठ लाख रुपए आंकी जाती है, वहीं नए नियम के बाद 18 से 24 लाख रुपए हो जाएगी। इससे ड्यूटी ज्यादा लगेगी।

रजिस्ट्री कराने से बच रहे हैं लोग
सूत्र बताते हैं कि चारों शहरों में नए नियमों के मुताबिक कृषि भूमि के प्लाट की रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या में कमी आ गई है। भोपाल में तो लोग केवल पूछताछ करने पहुंच रहे हैं, जबकि इंदौर में इक्का-दुक्का लोगों ने रजिस्ट्री कराई है। ग्वालियर में अभी इसकी शुरुआत नहीं हुई है।

विकसित प्लाट की परिभाषा
पंजीयन एवं मुद्रांक के केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा बदले गए नियमों के बाद अब शहरी क्षेत्र से अधिकांश गांव में होने वाली रजिस्ट्री विकसित प्लाट के मुताबिक होगी। इसके पीछे कारण यह है कि बदले गए नियम में विकसित प्लाट की जो परिभाषा दी गई है उसमें 100 मीटर की सीमा में पानी, बिजली, मैटल्ड रोड की सुविधा वाले भूखंड को विकसित प्लाट मान लिया गया है।

* शासन के आदेश से ऐसा लगता है कि अभी तक के मास्टर प्लान में जिन जमीनों को आवासीय घोषित कर दिया गया है, यह मान लिया गया है कि वहां कॉलोनियां बन गई हैं। जबकि वास्तव में वहां खेती हो रही है। शहरी क्षेत्र से लगे गांवों में कृषि भूमि के प्लाट की खरीद-फरोख्त करने वालों को रजिस्ट्री पर अब पहले की तुलना में ढाई से तीन गुना ज्यादा राशि खर्च करना होगी।
- सत्येंद्र कोचर, राजस्व अधिवक्ता

* गाइड लाइन के उपबंधों में संशोधन ऐसे लोगों पर अंकुश लगाना है, जो कृषि भूमि खरीदकर रख लेते हैं और ज्यादा कीमत होने पर बेच देते हैं। इससे रजिस्ट्री न करने की प्रवृत्ति बढ़ने की संभावना नहीं है, बल्कि संशोधन के बाद राजस्व आय में वृद्धि होगी। अभी तक किसी ने उनके सामने विरोध नहीं किया है।
- विनोद सेमवाल, महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक





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