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श्याम रंग में रंगी नगरिया..

अजमेर: krishna अजमेर नगरी मंगलवार की रात श्याम के रंग में रंगी रही। शहर कृष्णमय हो गया। शहर का प्रमुख कार्यक्रम सुभाष उद्यान में नगर परिषद द्वारा आयोजित किया गया। यहां ना तो पैर रखने को जगह थी, ना ही झांकियों से शहरवासियों की नजरें हट रही थी। देर रात तक यहां कान्हा के जन्मोत्सव की रौनक बरकरार रही।

सुभाष उद्यान को दुल्हन की तरह सजाया गया। पूरे पार्क में जगह-जगह पर झांकियां सजी थी। कहीं पर कान्हा माखन चुराते नजर आए तो कहीं पर सुदामा के चरण पखारते। झांकी पेश करने में शहर की विभिन्न संस्थाओं और व्यापारिक संस्थानों ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

पट्टी कटला के गणपति सेवक संघ ने एक साथ तीन झांकियां सजाई। गोपियों के वस्त्र चोरी करते कान्हा, राधा को झूला झूलाते कन्हैया और बाणों की शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह की झांकियां मुख्य गेट के पास थी। वहीं तुलसी सेवा संस्थान द्वारा सजाई गई झांकी में कान्हा गोपियों संग रास रचाते नजर आए। वी-मार्ट की झांकी में माखन चोरी करते हुए ग्वाल दिखाए गए। वहीं राजस्थान ब्राrाण महासभा ने कृष्ण द्वारा सुदामा के चरण पखारते हुए का दृश्य पेश किया। झरनेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति ने भोले श्ांकर का मनमोहक श्रंगार किया और बांके-बिहारी की झांकी सजाई। नाई महासभा ने कृष्ण-सुदामा की झांकी सजाई।

सीताराम बाबा बगीची ट्रस्ट ने असली गायों के साथ कान्हा की झांकी सजाई। अग्रवाल सेवा संस्थान द्वारा सजाई गई जेल में वासुदेव-देवकी और कान्हा की झांकी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा वीर हनुमान के कंधों पर राम-लक्ष्मण, गिर्राज पर्वत धारण करते कन्हैया की झांकी सजाई गई। झांकियों को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा।

बाल-गोपाल के रूप में नौनिहाल
अधिकांश बच्चे बाल-गोपाल के रूप में अपने माता-पिता के साथ सुभाष उद्यान पहुंचे। नन्हे बालकों के बाल कृष्ण रूप में पार्क में पहुंचने पर लोग भी उन्हे दुलारते नजर आए।

नहीं चल पाया वन-वे
भीड़ को काबू करने के लिए सुभाष पार्क में वन-वे रास्ते की व्यवस्था की गई। मगर व्यवस्था कायम नहीं रह सकी। कई लोगों को अलग-अलग पार्र्को में सजी झांकियों को देखने के लिए रास्तों की जानकारी नहीं थी।

दीपावली से ज्यादा रौनक
सुभाष पार्क में सजावट भले ही दीपावली के बराबर नहीं रही, मगर भीड़ दीपावली से भी ज्यादा रही। स्थिति यह रही कि मुख्य सड़क पर खड़े रहने की भी जगह नहीं थी।





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